50 लाख के गांजा की कार्रवाई में मनगवां पुलिस का ‘खेला’! जल्द हो सकता है बड़ा खुलासा
रीवा (मनगवां)। रीवा जिले के मनगवां थाना क्षेत्र में हाल ही में हुई बड़ी गांजा बरामदगी की कार्रवाई अब विवादों के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस ने लगभग 50 लाख रुपये मूल्य का गांजा जब्त करने का दावा किया है, किंतु इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध पुलिस की हिरासत से हथकड़ी सरकाकर फरार हो गया। वहीं, जिस कार से गांजा ले जाया जा रहा था, उसका चालक भी अभी तक लापता बताया जा रहा है।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, साक्ष्य सहित की शिकायत
गांजा प्रकरण में पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए युवक के परिजनों ने इस कार्रवाई को मनगढ़ंत बताते हुए रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से साक्ष्य सहित शिकायत की है। उनका आरोप है कि पुलिस ने निर्दोष युवक को फंसाया है, जबकि असली आरोपी फरार कर दिए गए या जानबूझकर छोड़े गए।
थाने में देर शाम खिंचा ‘सनाका’!
घटना के बाद देर शाम मनगवां थाना परिसर में अचानक सनाका खिंच गया, जब इस पूरी कार्रवाई से जुड़ी आंतरिक बातों को लेकर अफसरों के बीच खामोशी देखी गई। सूत्रों की मानें तो किसी वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में कुछ दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण में कुछ बड़ा खुलासा हो सकता है।
पुलिस पर आरोप: निजी स्वार्थ की पूर्ति या लापरवाही?
जन चर्चा में यह भी सामने आया है कि पुलिस ने कथित रूप से वाहन चालक को जानबूझकर छोड़ दिया। हालांकि, इस दावे की पुष्टि किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा अब तक नहीं की गई है। इस मुद्दे पर केवल यूट्यूब चैनलों और स्थानीय चर्चाओं के माध्यम से सूचनाएं फैल रही हैं, जिससे अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है।
सवाल IG स्तर की छवि पर भी
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ जिला पुलिस की छवि को प्रभावित करेगा, बल्कि रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेगा। जनता को यह जानने का अधिकार है कि सच क्या है—आरोपी वास्तव में फरार हुआ, छोड़ा गया या कुछ और?
प्रशासन से पारदर्शिता की अपेक्षा
हम इन आरोपों की पुष्टि नहीं करते, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस मामले में पारदर्शिता बेहद आवश्यक है। यदि किसी भी स्तर पर चूक या मनमानी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह जनचर्चा और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों का खंडन अथवा पुष्टि कर, सच्चाई जनता के सामने रखे।

