रीवा शर्मसार: संजय गांधी अस्पताल परिसर में नाबालिग से गैंगरेप, सुरक्षा और व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
पूर्व मंत्री पं. श्रीनिवास तिवारी की कल्पना से दूर हुआ रीवा का सबसे बड़ा अस्पताल, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर जनता में आक्रोश
रीवा
संजय गांधी अस्पताल परिसर में एक नाबालिग बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म क घटना ने पूरे रीवा जिले को झकझोर कर रख दिया है। यह वही संजय गांधी हॉस्पिटल है, जिसकी नींव मध्यप्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और विंध्य पुरुष पंडित श्रीनिवास तिवारी ने यह सोचकर रखी थी कि रीवा संभाग के लोगों को इलाज के लिए बाहर न भटकना पड़े। मगर आज यह अस्पताल चिकित्सा सेवा के बजाय अव्यवस्था, लापरवाही और अपराध का केंद्र बनता जा रहा है।
घटना के बाद रीवा वासियों का आक्रोश स्वाभाविक है। जिस अस्पताल में सुरक्षा पर हर साल करोड़ों खर्च किए जाते हैं, वहां एक मरीज की बेटी के साथ ऐसा घिनौना कृत्य होना बेहद शर्मनाक है। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद अपराधियों का बेखौफ होकर घटना को अंजाम देना प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। यह भी सवाल उठता है कि जब अस्पताल जैसी जगह पर महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो आम सड़क पर उनका क्या होगा?
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
गौरतलब है कि रीवा विधायक और मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला के पास स्वास्थ्य विभाग भी है। बावजूद इसके, संजय गांधी हो या निजी अस्पताल, दोनों जगहों से लगातार मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट, लापरवाही और घटिया दवाओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। यह एक दुखद विरोधाभास है कि जहां डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, वहीं यहां इलाज के बजाय मरीज को पीड़ा और अपमान मिल रहा है।
इस घटना के बाद एक के बाद एक कई सवाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के ऊपर उठ रहे हैं:
क्या घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दी गई?
अस्पताल प्रशासन ने FIR दर्ज कराने में सहयोग किया या लापरवाही बरती?
पीड़िता को किन परिस्थितियों में छुट्टी दी गई और छुट्टी देने वाला कौन था?
क्या पहले भी ऐसे मामले अस्पताल परिसर में दबाए गए हैं?
क्या डॉक्टरों की भूमिका पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए?
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज
घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाबालिग के साथ हुए इस अपराध को यदि गंभीरता से नहीं लिया गया, तो समाज में कानून और सुरक्षा के प्रति विश्वास खत्म हो जाएगा।
विकास की जगह कलंक बनता रीवा?
रीवा को शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के लिए जाना जाता था, लेकिन अब आए दिन हो रही शर्मनाक घटनाएं इस छवि को धूमिल कर रही हैं। जनता ने भरोसे के साथ अपने जनप्रतिनिधियों को चुना था, लेकिन आज उनकी चुप्पी जनता को भीतर तक झकझोर रही है। सवाल यह है कि क्या जनप्रतिनिधि अब भी सोए रहेंगे या इस बार उनके मुंह से जवाब आएगा?
इस घटना ने न सिर्फ रीवा बल्कि पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह केवल एक लड़की के साथ अन्याय नहीं, बल्कि पूरे समाज के भरोसे का बलात्कार है। अब देखना यह है कि क्या दोषियों को सजा मिलती है या यह भी एक और ‘दबाया गया सच’ बन कर रह जाएगा।

