भोपाल से आदेश, लेकिन ज़मीन पर सन्नाटा: रसूखदारों के आगे निष्क्रिय कानून व्यवस्था!
हूटर, नीली-लाल बत्ती, VIP स्टीकर और फर्जी नंबर प्लेट पर अब नहीं चलेगी मनमानी — भोपाल पुलिस मुख्यालय ने जारी किए कड़े निर्देश
✍🏻 विंध्य वसुंधरा समाचार की विशेष रिपोर्ट
भोपाल/रीवा।
क्या देश में कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है?
क्या नेताओं, अफसरों और रसूखदार पत्रकारों के लिए नियमों की कोई अहमियत नहीं बची?
भोपाल पुलिस मुख्यालय का एक सख्त आदेश अब यही सवाल उठाने पर मजबूर कर रहा है।
दिनांक 01 मार्च 2025 को मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एक विशेष आदेश (क्रमांक 482/2025) जारी किया है, जिसमें पूरे प्रदेश के पुलिस आयुक्तों और जिलों के पुलिस अधीक्षकों को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि निजी वाहनों में हूटर, फ्लैश लाइट (लाल-नीली बत्ती), VIP स्टीकर और फर्जी नंबर प्लेट का प्रयोग तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए और इसके उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस का स्पष्ट आदेश: नहीं चलेगा कोई बहाना
आदेश के अनुसार, 15 मार्च 2025 तक समस्त जिलों में विशेष चेकिंग अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की पहचान की जानी है जो कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। 18 मार्च तक प्रत्येक जिले से कार्रवाई की रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर वाहन जब्त किया जाएगा।
आदेश तो जारी हुआ... मगर अमल कहां है?
जिन रसूखदारों को कानून के पालन में सबसे आगे होना चाहिए, वही इसे ठेंगा दिखा रहे हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेता, अफसरों से संबंध रखने वाले तथाकथित समाजसेवी, और यहां तक कि पत्रकारिता से जुड़े लोग भी अपनी गाड़ियों में वीआईपी स्टीकर, हूटर और नीली-लाल बत्तियाँ लगाकर सड़कों पर ऐसे घूमते हैं मानो पूरा प्रदेश उनका निजी राज्य हो।
आम जनता अगर हेलमेट या सीट बेल्ट न लगाए तो उसी समय चालान बनता है, लेकिन नियम तोड़ते रसूखदारों के सामने पुलिस की गाड़ियों की भी नज़रें झुक जाती हैं।
क्या यही है "सबके लिए समान कानून" का आदर्श?
राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक डर?
जब आम जनता इन वाहनों की शिकायत करती है, तो पुलिस कभी वाहन "पैचानने" में असमर्थ रहती है तो कभी "ऊपर से आदेश" न होने का बहाना बना देती है। इसका सीधा अर्थ है कि कानून तो बना है, लेकिन उसे लागू करने वाले ही अपने हाथ बाँधे बैठे हैं — या फिर सत्ता के इशारे पर आंखें मूंदे हुए हैं।
"एक गाड़ी पकड़ी गई तो नियम याद आया"
आदेश में उल्लेख है कि एक ज़िले में वीआईपी मूवमेंट के दौरान ऐसा ही एक अवैध वाहन पकड़ा गया, जिस पर मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पर सवाल यह है — क्या केवल एक उदाहरण से पूरे प्रदेश की सड़कों पर कानूनी भय स्थापित किया जा सकता है?
जनता बोले — अब सहन नहीं होगा ये VIP आतंक
आम लोगों में रोष है। वे पूछ रहे हैं कि क्या कानून सिर्फ हेलमेट और ट्रैफिक लाइट के लिए है? क्या प्रशासन का साहस केवल उन लोगों पर चलता है जो गरीब या आम नागरिक हैं?
जनता चाहती है कि यदि पुलिस वाकई गंभीर है तो हर जिले में VIP स्टीकर, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगे निजी वाहनों की सूची प्रकाशित की जाए और यह बताया जाए कि उन पर क्या कार्रवाई हुई।
✅ अब क्या करें आम नागरिक?
यदि आपको कोई वाहन नियमों का उल्लंघन करते हुए दिखाई दे —
📸 उसकी तस्वीर लें
📍 स्थान और समय नोट करें
📧 और ईमेल करें: cell02_ptri@mppolice.gov.in या aig_ptri@mppolice.gov.in
आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
भोपाल पुलिस मुख्यालय ने तो आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी निभा दी, लेकिन अब जिम्मेदारी प्रदेश के पुलिस अधीक्षकों और प्रशासन की है कि वे बिना भेदभाव के हर ऐसे वाहन पर कार्रवाई करें जो कानून का मखौल बना रहा है।
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल पुलिस की साख पर सवाल उठाएगा, बल्कि आम जनता के कानून में भरोसे को भी गहरा आघात पहुंचाएगा।
अब वक्त है – कानून सब पर समान रूप से लागू करने का। चाहे वह कोई नेता हो, अधिकारी हो या पत्रकार।
