रीवा में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार का खुलासा चोरहटा थाना और औषधि विभाग की संयुक्त छापेमारी में एक मेडिकल सील, अन्य तीन संचालक फरार
रीवा जिले में युवाओं को नशे के गर्त में ढकेलने वाला एक बड़ा नेटवर्क बेनकाब हुआ है। जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक योजनाबद्ध अभियान चलाकर नशीली एवं प्रतिबंधित दवाओं के अवैध संग्रहण एवं बिक्री में लिप्त मेडिकल स्टोरों पर बड़ी कार्यवाही की है। यह कार्रवाई कलेक्टर जिला रीवा एवं पुलिस अधीक्षक रीवा के निर्देश पर औषधि निरीक्षक राधेश्याम वट्टी और थाना चोरहटा प्रभारी आशीष मिश्रा की अगुवाई में अंजाम दी गई।
नशे के लिए दुरुपयोग होने वाली टेबलेट्स की सप्लाई में कई मेडिकल स्टोर संलिप्त
एक दिन पूर्व थाना चोरहटा पुलिस द्वारा नशे के लिए दुरुपयोग की जाने वाली भारी मात्रा में टेबलेट्स जब्त की गई थीं। पुलिस जांच में सामने आया कि यह प्रतिबंधित औषधियां कुछ स्थानीय मेडिकल दुकानों से अवैध रूप से सप्लाई की जा रही थीं।
सूचना के आधार पर औषधि विभाग एवं पुलिस टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए तीन से चार संदिग्ध मेडिकल दुकानों पर एक साथ दबिश दी। इन छापों में एक मेडिकल स्टोर — अंबालिका मेडिकल एजेंसी — से भारी अनियमितता सामने आई, जिसके आधार पर उसे तत्काल सील कर दिया गया।
तीन मेडिकल संचालक फरार, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी
छापेमारी की भनक लगते ही तीन अन्य मेडिकल स्टोर संचालक मौके से फरार हो गए। प्रारंभिक जांच में इनकी संलिप्तता भी संदिग्ध मानी गई है। पुलिस द्वारा उनके ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और शीघ्र नामों का खुलासा कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
NDPS एक्ट और ड्रग्स ऐक्ट के तहत होगी कठोर कार्यवाही होगी
मेडिकल संचालकों के विरुद्ध एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत कठोर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया जाएगा। इन धाराओं के अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर संबंधित संचालकों को कई वर्षों की सजा और भारी आर्थिक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन का सख्त आदेश अब नहीं चलेगा नशे का धंधा
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रीवा में नशीली दवाओं के अवैध व्यापार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे तत्वों के खिलाफ बिना किसी दबाव या सिफारिश के सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी। यह भी संकेत मिले हैं कि आगामी दिनों में अन्य मेडिकल स्टोर्स की भी गहन जांच की जाएगी।
बढ़ते नशे का संकट और सामाजिक चिंता
रीवा सहित मऊगंज, गुढ़, चोरहटा क्षेत्रों में लंबे समय से यह आशंका जताई जा रही थी कि कुछ मेडिकल दुकानों से नशे की गोलियों की अवैध आपूर्ति हो रही है। यह गोलियां ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम, कोरेक्स सिरप जैसी नशीली श्रेणियों की थीं, जो युवाओं और किशोरों में नशे की लत बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही थीं।
इस अवैध व्यापार ने स्कूल-कॉलेज के छात्रों और बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया है, जिससे क्षेत्र में अपराध, मानसिक असंतुलन और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी बढ़ी हैं।
संभागीय आयुक्त संभाग रीवा को विशेष ध्यान देकर समस्त जिला कलेक्टरों के माध्यम से औषधि निरीक्षकों के ऊपर सख्त कार्यवाही की जाए क्योंकि मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच औषधि निरीक्षकों की जिम्मेदारी है किंतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिस तरह से मेडिकल हाल मेडिकल स्टोर के लाइसेंस शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक दिए जा रहे हैं इन मेडिकल और मेडिकल हाल में खरीदी गई दवाइयां किन मेडिकल स्टोर को बिक्री की गई और उन मेडिकल स्टोर धारकों द्वारा किस डॉक्टर की पर्ची पर दवा बिक्री की गई यदि इन बिंदुओं की जांच हो और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए क्योंकि वर्तमान समय में जिस तरह से मेडिकल नशे की गिरफ्त में रीवा संभाग है यह निश्चित एक गंभीर चिंता का विषय है और मेडिकल नशे पर पुलिस का अकेले रोक पाना संभव नहीं है इसलिए औषधि निरीक्षक के ऊपर विशेष जिम्मेदारी ठहराते हुए ऐसे शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक संभाग में मेडिकल स्टोरों की गहन जांच की आवश्यकता है जिससे नशा कारोबारी की कमर तोड़ी जा सके

