खाद संकट में किसान परेशान, कालाबाजारी करने वाले मस्त 100 बोरी खाद की अवैध बिक्री का वीडियो वायरल, प्रशासन पर उठे सवाल
जिले में एक ओर किसान खाद की एक बोरी के लिए घंटों लाइन में खड़े होकर परेशान हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी करने वाले दबंग खुलेआम किसानों के हिस्से की खाद बेच रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में करीब 100 बोरी खाद की अवैध बिक्री का आरोप लगाया गया है। इस वीडियो ने जिले की खाद वितरण व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
वायरल वीडियो और ठिकाना
स्थानीय लोगों एवं वायरल वीडियो के अनुसार, यह अवैध बिक्री गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत पोस्ट ऑफिस के सामने बने खपड़ैल मकान के पास से की जा रही बताई गई है। हालांकि विंध्य वसुंधरा समाचार इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। यह खबर पूरी तरह स्थानीय लोगों की जानकारी और वायरल वीडियो के आधार पर प्रकाशित की जा रही है।
किसानों की बेबसी
खाद के लिए सुबह से लाइन में लगने वाले किसान त्यौहार, रोज़मर्रा के काम और भूख-प्यास की परवाह छोड़कर अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं। लेकिन घंटों खड़े रहने के बाद भी अधिकांश किसान खाली हाथ लौट जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ कालाबाजारी करने वाले दबंगों के पास 100 बोरी खाद जमा होने और बेचे जाने की चर्चा से किसानों का गुस्सा और बढ़ गया है।
प्रशासन पर उठे सवाल
जिला कलेक्टर से लेकर राजस्व विभाग और संबंधित अमला लगातार दावा कर रहा है कि खाद की आपूर्ति और वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि दुकानों से आधार कार्ड इकट्ठा कर खाद की हेराफेरी की जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि—
👉 किसानों तक खाद नहीं पहुँच रही तो फिर कालाबाजारी करने वालों तक यह 100 बोरी खाद कैसे पहुँची?
👉 क्या इसमें दबंग नेताओं और अधिकारियों के करीबी शामिल हैं?
👉 और निगरानी तंत्र होने के बावजूद इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे संभव है?
किसानों की मांग
किसानों का कहना है कि यह केवल अवैध बिक्री का मामला नहीं है बल्कि उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। प्रशासन को चाहिए कि वायरल वीडियो और शिकायतों को गंभीरता से लेकर तत्काल ऐसे ठिकानों पर छापामार कार्रवाई करे और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।
रीवा समेत विंध्य अंचल में खाद संकट किसानों की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अब देखना यह है कि वायरल वीडियो के बाद क्या वाकई जिला प्रशासन कालाबाजारी करने वालों तक पहुँच पाता है या फिर यह मामला भी महज़ चर्चा तक सीमित रह जाएगा।


