टूटी माला जैसे बिखरी किस्मत किसान की खाद संकट पर भड़के किसान, नईगढ़ी तहसील का घेराव – पिन्टू सिंह के नेतृत्व में गरजी किसान कांग्रेस
मऊगंज संवाददाता।
विंध्य की धरती पर खेती-किसानी एक बार फिर संकट से जूझ रही है। कभी बरसात का कहर, तो कभी खाद और बीज की कमी—किसान की तकदीर मानो टूटी माला की तरह बिखर गई है। इस दर्द को आवाज़ देने के लिए मंगलवार को किसान कांग्रेस ने नईगढ़ी तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन कर प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया।
रीवा जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष नृपेन्द्र सिंह पिन्टू के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में सैकड़ों किसान उमड़े। किसानों ने तख्तियां लहराईं, नारे लगाए और सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप मढ़ा।
खाद की कमी और मनमानी बिक्री पर आक्रोश
किसानों ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सरकारी समितियों में खाद की आपूर्ति ठप है। किसान सुबह से शाम तक लाइन में लगे रहते हैं, फिर भी खाद हाथ नहीं लगती। दूसरी ओर, निजी दुकानों पर अमानक खाद खुलेआम बेची जा रही है और उस पर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
किसान कांग्रेस अध्यक्ष पिन्टू सिंह ने कहा—
“आज किसान खेत में खून-पसीना बहाकर भी बदहाली का शिकार है। महंगे खाद, नकली बीज और जंगली जानवरों की मार ने खेती को घाटे का धंधा बना दिया है। सरकार ने यदि तत्काल कदम नहीं उठाए, तो किसान कर्ज और आत्महत्या की खाई में धकेल दिए जाएँगे।”
माँगों का पुलिंदा प्रशासन को सौंपा
प्रदर्शन के बाद किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, मऊगंज को ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रमुख माँगें शामिल थीं—
नईगढ़ी तहसील में किसानों को तत्काल पर्याप्त खाद उपलब्ध कराया जाए।
समितियों और बाजार में अमानक खाद व ऊँचे दामों पर बिक्री पर सख्ती से रोक लगे।
किसानों को 20-20-13 की जगह 18-46 डीएपी दी जाए, जो कृषि उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
यूरिया के साथ जबरन अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव रोका जाए।
सेवा सहकारी समितियों में नकद और वस्तु अनुपात 60-40 पूर्ववत लागू हो।
समितियों को मिलने वाली खाद की सूची सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
गैर-पंजीकृत लेकिन भू-अधिकार पत्रधारी किसानों को भी खाद मिले।
आवारा मवेशियों और जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए प्रशासन ठोस रणनीति बनाए।
कांग्रेस नेताओं की एकजुटता
आंदोलन में कांग्रेस के दिग्गज नेता किसानों के साथ खड़े दिखे। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश पटेल, पूर्व विधायक विद्यावती पटेल, पूर्व जिला अध्यक्ष मऊगंज पद्मेश गौतम, जनपद उपाध्यक्ष नईगढ़ी जुल्फीलाल साकेत, वरिष्ठ नेता गिरिजा सिंह, विष्णु प्रताप सिंह, पिन्टू सिंह, हीरामणि मिश्रा, रामसजीवन सोनी, प्रमोद द्विवेदी, जनपद सदस्य शिवकली पटेल, सुधाकर द्विवेदी, सुमन पटेल, सच्चेलाल पटेल, डॉ. आर.पी. सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान आंदोलन स्थल पर मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की आवाज़ दबाने की कोशिश किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि सरकार ने अनदेखी की तो आंदोलन की गूंज भोपाल तक सुनाई देगी।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने प्रशासन को साफ चेताया कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। किसान नेताओं का कहना था कि “किसानों की किस्मत अब और बिखरने नहीं दी जाएगी। यह लड़ाई हक की है और इसे अंजाम तक ले जाया जाएगा।”





