स्वच्छ भारत मिशन का सच: गंगेव जनपद पंचायत में स्वच्छता के नाम पर खानापूर्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छ भारत अभियान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष निर्देश के बाद मध्यप्रदेश की हर पंचायत में स्वच्छता पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जिला कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने भी सभी जनपद पंचायत सीईओ को आदेश दिए हैं कि वे जमीनी हकीकत का आकलन कर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करें, ताकि शासन और भारत सरकार की योजनाओं का सही विस्तार हो।
लेकिन रीवा जिले की गंगेव जनपद पंचायत इस मिशन को पूरी तरह दरकिनार कर रही है। यहां सीईओ प्राची चौबे पर आरोप है कि स्वच्छता अभियान केवल कागज़ों और रिपोर्टों तक ही सीमित है, जबकि गांव और कस्बों की असलियत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
📌 गंगेव जनपद पंचायत का हाल
गंगेव क्षेत्र की 88 ग्राम पंचायतों में से कई पंचायतों का हाल बेहाल है। विशेष रूप से गढ़ पंचायत और गढ़ बाजार क्षेत्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यह इलाका लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है और आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों का यहां आना-जाना रहता है। लेकिन यहां की तस्वीर प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रही है।
प्राथमिक बालक शाला गढ़ के रसोईघर और स्कूल परिसर में बाजार का कचरा फेंका जा रहा है।
कन्या हाई स्कूल गढ़ के पास और आसपास के होटल क्षेत्रों में गंदगी के ढेर दुर्गंध फैला रहे हैं।
प्रधानमंत्री सड़क, नईगढ़ी रोड, फोर लेन मार्ग और अन्य बस्तियों की गलियों के दोनों ओर कचरे के अम्बर का साम्राज्य है।
पंचायत परिसर तक गंदगी फेंकी जा रही है, जिससे बच्चों और ग्रामीणों का स्वास्थ्य खतरे में है।
📌 अधिकारियों का ढीला रवैया
जब इस मामले पर जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से पक्ष जानना चाहा गया, तो किसी ने भी जवाब देने की जहमत नहीं उठाई। उल्टा यह कहा गया कि पत्रकार भ्रामक और गुमराह करने वाली खबरें चला रहे हैं।
प्रश्न यह है कि –
👉 यदि समाचार भ्रामक हैं, तो प्रशासन कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं करता?
👉 और यदि गंदगी की तस्वीरें व वीडियो वास्तविक हैं, तो अधिकारियों पर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती?
जनता का कहना है कि सच्चाई छिपाने की बजाय व्यवस्था सुधारना जरूरी है।
📌 स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल
स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य हर गांव और हर पंचायत को साफ-सुथरा बनाना है। इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, पंचायतों को बजट आवंटित हो रहा है, सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। लेकिन गंगेव जनपद पंचायत जैसे उदाहरण इस अभियान को सिर्फ राजनीतिक नारेबाजी बना रहा है।
📌 प्रशासनिक सख्ती की मांग
जनता की मांग है कि शासन इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए। यदि गंगेव जनपद पंचायत की सीईओ और अन्य अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में अधिकारी केवल कागजों पर स्वच्छता दिखाकर शासन को गुमराह न कर सकें।
रीवा जिले की गंगेव जनपद पंचायत की स्थिति यह साबित करती है कि नीतियां और योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका क्रियान्वयन ईमानदारी से किया जाए। यदि हालात नहीं सुधरे तो स्वच्छ भारत अभियान केवल “कचरा छिपाने का अभियान” बनकर रह जाएगा।



