रीवा से शुरू हुआ 'साइकिल दिवस' अभियान: पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवन की ओर एक सराहनीय कदम
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विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा, 5 अगस्त 2025।
रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को जनोन्मुखी बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए ‘सुमंगल साइकिल दिवस’ की शुरुआत की है। अब हर मंगलवार को संभागीय मुख्यालय के साथ-साथ जिलों में भी अधिकारी और कर्मचारी साइकिल से कार्यालय पहुंचेंगे। इस पहल के पहले दिन कमिश्नर बीएस जामोद स्वयं अधिकारियों के साथ साइकिल चलाकर अपने आवास से कार्यालय पहुंचे और साप्ताहिक समीक्षा बैठक में भाग लिया।
इस नवाचार के तहत उन अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक साधनों (ई-स्कूटी, ई-रिक्शा, या आंशिक रूप से पैदल यात्रा) की अनुमति दी गई है, जो आयु या स्वास्थ्य कारणों से साइकिल चलाने में असमर्थ हैं। साइकिल से कार्यालय आने वालों में महिला अधिकारी भी शामिल रहीं। वहीं सभी जिलों में कलेक्टर और जिला स्तरीय अधिकारी भी इस अभियान में उत्साहपूर्वक भागीदार बने।
कमिश्नर का संदेश: साइकिल चलाओ, स्वास्थ्य और पर्यावरण बचाओ
कमिश्नर जामोद ने बताया कि सप्ताह के एक दिन, विशेष रूप से मंगलवार को 'साइकिल डे' के रूप में अपनाने का उद्देश्य सिर्फ ईंधन की बचत नहीं, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने अपील की कि सरकारी अधिकारी ही नहीं, आमजन और सामाजिक संगठन भी सप्ताह में एक दिन साइकिल का प्रयोग करें। यह अभियान प्रधानमंत्री के 'फिट इंडिया मूवमेंट' को भी बल देगा। उन्होंने कहा – “हम सबने बचपन और युवावस्था में साइकिल का भरपूर उपयोग किया है, अब फिर से उसे अपनाने का समय है। साइकिल चलाना सबसे अच्छा व्यायाम भी है।”
अधिकारियों के अनुभव: जुड़ाव, ऊर्जा और सुशासन की नई अनुभूति
साइकिल से कार्यालय आने का अनुभव साझा करते हुए जन अभियान परिषद के संभागीय समन्वयक प्रवीण पाठक ने इसे सामूहिकता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सशक्त कदम बताया। डिप्टी कमिश्नर श्रेयस गोखले ने कहा कि मंगलवार को जनसुनवाई होती है और साइकिल से आने पर मानसिक दृष्टिकोण अधिक संवेदनशील और नागरिकों के प्रति जुड़ावपूर्ण हो जाता है, जो सुशासन का प्रमाण है।
इस अवसर पर सहायक संचालक कृषि प्रीति द्विवेदी, संभागीय प्रबंधक मार्कफेड नेहा पीयूष तिवारी, संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय अनिल दुबे समेत अन्य अधिकारियों ने भी अपने सकारात्मक अनुभव साझा करते हुए इस नवाचार को अनुकरणीय बताया।
रीवा संभाग से शुरू हुई यह पहल सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक और दूरगामी सोच है। यदि इस सोच को प्रदेश और देश भर में विस्तार मिले, तो यह न केवल पर्यावरण और ऊर्जा संकट की दिशा में राहत देगा, बल्कि नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की दिशा में भी प्रेरित करेगा।


