सहकारिता के सहारे आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम : रीवा में सहकार भारती जिला इकाई की बैठक में राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 पर हुआ मंथन
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा/मऊगंज मध्यप्रदेश, 5 अगस्त 2025
अनंत बैंकेट हाल, रीवा में आज सहकार भारती जिला इकाई द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण कार्यकारिणी बैठक में राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 पर गहन विमर्श किया गया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब केंद्र सरकार सहकारिता को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में शामिल करते हुए इसे गांव-गरीब-किसान के सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बना रही है।
बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष ऋषि कुमार शुक्ल ने राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यह नीति देश में "नौकरी नहीं, मालिक पैदा करो" की दिशा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में पहली बार स्वतंत्र भारत के इतिहास में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय का गठन हुआ है। इसके साथ ही गुजरात राज्य में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना कर सहकारिता के क्षेत्र में उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान की व्यवस्था की गई है।
बैठक के प्रमुख निर्णय व बिंदु
बैठक में जिन प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई, वे इस प्रकार हैं—
1. देश भर की प्राथमिक सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय समितियों में बदला जाएगा, जिससे वे कृषि, विपणन, डेयरी, मत्स्य, हस्तशिल्प, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर सकें।
2. प्रत्येक ग्राम पंचायत में बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक सहकारिता की पहुंच और उपयोगिता बढ़ाई जा सके।
3. पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत सहकारिता संगठनों को निजी क्षेत्र के साथ मिलकर कार्य करने की छूट दी जाएगी। इससे बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाए जा सकेंगे।
4. सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार का सृजन कर अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
प्रेस वक्तव्य में यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह नीति केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को एक राष्ट्रीय जनांदोलन में परिवर्तित करना है।
सहकारिता से बनेगा ‘विश्वगुरु भारत’
बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष ऋषि कुमार शुक्ल ने कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक भारत सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर नहीं बन सकेगा। उन्होंने आह्वान किया कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े ग्रामीणों को सहकारिता के माध्यम से जोड़ा जाए और उन्हें उत्पादन, विपणन एवं वितरण में साझेदार बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन को सफल बनाने के लिए सभी कार्यकर्ताओं को संगठित होकर कार्य करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि जब तक कोई व्यक्ति स्वयं अपनी सहकारी समिति का गठन नहीं करेगा, तब तक वह आत्मनिर्भरता की ओर कदम नहीं बढ़ा पाएगा। हर पंचायत स्तर पर एक बहुउद्देशीय सहकारी समिति का गठन अनिवार्य किया जाएगा।
प्रेरणादायक नेतृत्व और समर्पण से नीतियां हो रही हैं साकार
बैठक में सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व की सराहना की गई, जिनके प्रयासों से यह ऐतिहासिक नीति अस्तित्व में आई है। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय बाद सहकारिता मंत्रालय को स्वतंत्र पहचान मिली है, जो स्वयं में एक क्रांतिकारी कदम है।
महत्वपूर्ण उपस्थिति व वक्तव्य
बैठक में प्रमुख रूप से विभाग प्रमुख संजय पाण्डेय, जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम, जिला संगठन प्रमुख शमीर टंडन, जिला महामंत्री गौरव शुक्ल, महिला प्रमुख नीतू पाठक, जिला उपाध्यक्ष सुधीर मिश्रा, नगर अध्यक्ष चंद्रसेन पाण्डेय, महेश शुक्ल सहित जिला कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण उपस्थित रहे। सभी ने सहकारिता नीति 2025 को ऐतिहासिक दस्तावेज मानते हुए इसका स्वागत किया।
नीति को ग्राम स्तर तक पहुंचाने का अभियान
बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि सहकार भारती की रीवा जिला इकाई इस नीति को प्रत्येक ग्राम पंचायत तक पहुंचाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग सहकारिता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में भागीदार बन सकें।
यह भी स्पष्ट किया गया कि सहकारिता अब केवल संस्था नहीं बल्कि जन-जन का आंदोलन बनेगा। इसके माध्यम से देश में आर्थिक समानता, सामाजिक समरसता और रोजगार के नए अवसरों का द्वार खुलेगा।
रीवा में आयोजित यह बैठक सहकारिता के नए युग की दस्तक मानी जा रही है। राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेकर सहकार भारती की रीवा इकाई एक बार फिर सहकारिता क्रांति का वाहक बनने के लिए तैयार खड़ी है।

