ग्राम पंचायत आलमगंज की सड़क योजना में भ्रष्टाचार का जाल — जनता की आवाज़ दबाने में लगे अफसर, सवालों के घेरे में जनपद अध्यक्ष और पीडब्ल्यूडी विभाग
रीवा। जनपद पंचायत गंगेव के अंतर्गत ग्राम पंचायत आलमगंज की सड़क और पुल निर्माण योजनाएं आज भ्रष्टाचार, लापरवाही और राजनीतिक खेल का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, करोड़ों रुपये की स्वीकृति और भूमि पूजन के बावजूद आज तक न तो सड़क की गुणवत्ता सुधरी, न पुल सुरक्षित बने, बल्कि बरसात में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि गांवों का संपर्क टूट जाता है और लोग बीमारों को लकड़ी पर लादकर ले जाने को मजबूर हो जाते हैं।
2003 से शुरू हुआ विकास — लेकिन बीच में बढ़ी लापरवाही
सन 2003 में भाजपा सरकार और माननीय गिरीश गौतम के विधायक बनने के बाद आलमगंज पंचायत को पक्की सड़क, जूनियर विद्यालय, ईजीएस भवन, प्रणामी टोला में 25 हैंडपंप, परौहान और सिग्मा टोला की सड़क जैसी बड़ी सौगातें मिलीं। पूर्व विधायक पन्नाबाई प्रजापति और डॉ. पंचू लाल प्रजापति ने आलमगंज 23 से आलमगंज 24 को जोड़ने वाला नहर मार्ग सड़क में तब्दील कराया, और सांसद जनार्दन मिश्रा के प्रयास से 4.5 करोड़ रुपये की पीडब्ल्यूडी सड़क योजना स्वीकृत हुई, जिसका 2022 में भूमि पूजन हुआ।
निर्माण में धांधली: पुल से पानी नहीं निकलता
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण का ठेका 'आराध्य कंस्ट्रक्शन' को दिया गया, जिसके मालिक विकास तिवारी स्वयं जनपद पंचायत गंगेव के अध्यक्ष हैं।
पुलों का डिज़ाइन ऐसा कि एक बूंद पानी भी नहीं निकलता, जिससे बरसात में सड़क जलमग्न हो जाती है।
कार्य में घटिया सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई।
ग्रामीणों ने कई बार विभाग को शिकायत दी, लेकिन अधिकारियों ने कार्रवाई की जगह मामले को दबा दिया।
राजनीतिक संरक्षण से बच रहे भ्रष्टाचार के आरोपित
गांव के लोग साफ कहते हैं — चूंकि विकास तिवारी भाजपा का झंडा थाम चुके हैं, इसलिए स्थानीय भाजपा नेताओं और अफसरों का संरक्षण उन्हें मिलता है। यही कारण है कि शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
पूर्व सरपंच के कार्य भी रोके
पूर्व सरपंच जगमोहन प्रजापति के कार्यकाल में स्वीकृत दो आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण जनपद अध्यक्ष ने एसडीएम के दबाव से रुकवा दिया, जिससे पंचायत को राशि लौटानी पड़ी।
सड़क का रूट बदलकर निजी लाभ
सांसद से स्वीकृत सड़क — अशोक तिवारी के घर से वशिष्ठ पेट्रोल पंप, नेशनल हाईवे तक — को बदलकर संभुवन पांडे से श्रीनिवास दुबे के घर तक डीएमएफ फंड से करा दिया गया। यह मार्ग 500 मीटर पट्टे की भूमि से गुजरता है, जिससे कुछ विशेष लोगों को लाभ मिला।
विधायक भी सवालों के घेरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद अध्यक्ष ने भाजपा विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति को गुमराह किया। विधायक बनने के बाद दो साल से ऊपर का समय बीत चुका है, लेकिन क्षेत्र में समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
पुल निर्माण में खुली लापरवाही
2017 में पंचायत ने आलमगंज 23-24 को जोड़ने के लिए मात्र 1 लाख रुपये में पुल बनवाया, जिसकी चौड़ाई बेहद कम थी और अतिवृष्टि में बह गया।
पीडब्ल्यूडी ने बाद में 5 लाख रुपये में नया पुल 30 मीटर आगे बनाया, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई।
ठेकेदार जानते थे कि पुराना पुल तकनीकी खामी के कारण बहा था, फिर भी वही गलती दोहराई गई।
जनता की नाराज़गी और बड़ा सवाल
गांव में चर्चा है — जो विकास तिवारी कांग्रेस में रहते भाजपा नेताओं की आलोचना करते थे, वही अब भाजपा में आकर पार्टी को भीतर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। जनता का कहना है कि भाजपा के नाम पर सत्ता में रहकर विकास कार्यों को ठेकेदारी और भ्रष्टाचार का जरिया बनाया जा रहा है।

