पत्रकारिता के नाम पर ‘यूरिया वसूली’ — मऊगंज में गरमाई बहस, प्रशासन मौन
खाद विक्रेताओं ने लगाए गंभीर आरोप, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल जांच की मांग
रीवा/मऊगंज (विंध्य वसुंधरा समाचार)। 13 अगस्त 2025
मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में पत्रकारिता के नाम पर कथित वसूली और दबंगई का मामला इन दिनों जनचर्चा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय खाद विक्रेताओं का आरोप है कि कुछ तथाकथित पत्रकार खुलेआम दुकानों पर पहुंचकर यूरिया खाद की बोरियां ‘निजी उपयोग’ के नाम पर उठा ले जाते हैं, और विरोध करने पर विभागीय कार्रवाई की धमकी देते हैं।
सूत्रों के अनुसार, मऊगंज, नईगढ़ी, गढ़, कटरा सहित आसपास के कस्बों में यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि एक कथित पत्रकार, भीर निवासी पांडे, लगभग 250 से 300 बोरी तक यूरिया खाद विभिन्न दुकानों से ले चुका हैं। कई दुकानदारों ने बताया कि यह व्यक्ति कैमरा और मोबाइल लेकर दुकान पर आता है, पहले वीडियो बनाता है, फिर थाना प्रभारी और विभागीय अधिकारियों का नाम लेकर धमकी देता है— “अभी तुम्हारी खाद जप्त कर दूंगा”।
नाम न छापने की शर्त पर दुकानदारों का खुलासा
एक खाद विक्रेता ने बताया—
"वह सीधे दुकान में घुस आता है, कैमरे से वीडियो बनाता है, फिर कहता है कि तुम्हारे खिलाफ रिपोर्ट करूंगा। डर के कारण हम लोग उसे 25-30 बोरी तक यूरिया दे देते हैं, जबकि यह नियमों के खिलाफ है।"
दुकानदारों का कहना है कि वे डर के माहौल में व्यापार कर रहे हैं और यदि आवाज उठाई, तो प्रशासनिक दबाव में कार्रवाई का डर बना रहता है।
पत्रकारिता की गरिमा पर चोट
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर यह आरोप सच हैं, तो यह न केवल पत्रकारिता की साख पर गहरी चोट है, बल्कि समाज में भय और अविश्वास का माहौल भी पैदा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है— “पत्रकार का काम सच उजागर करना है, न कि दबाव बनाकर माल उठाना”।
जांच की मांग — सीसीटीवी, बिल रजिस्टर और कॉल डिटेल से खुल सकता है सच
जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण की गहन जांच के लिए संबंधित दुकानों के सीसीटीवी फुटेज, बिल रजिस्टर और मोबाइल कॉल डिटेल की जांच अनिवार्य है। इससे यह स्पष्ट होगा कि खाद किसे, कब और कैसे दी गई।
कई व्यापारी व ग्रामीण गोपनीय रूप से जांच एजेंसियों को वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान छिपाने की शर्त रखी है, ताकि उन्हें प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
प्रशासन पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला और संभाग स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इस गतिविधि से अनजान हैं, या फिर शिकायतों के बावजूद मौन साधे हुए हैं? यदि उच्च अधिकारी ही चुप्पी साध लें, तो यह उन लोगों के लिए खुला निमंत्रण है जो पद और पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं।
कानून की नजर में अपराध
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना लाइसेंस बड़ी मात्रा में खाद उठाना, फर्जी बहाने से माल प्राप्त करना और व्यापारियों को धमकाना, भारतीय दंड संहिता के कई प्रावधानों के तहत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई हो सकती है।
जांच के बाद ही सच सामने आएगा
फिलहाल यह मामला आरोपों के घेरे में है, और सच क्या है यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन यह निश्चित है कि इस प्रकरण ने पत्रकारिता के पेशे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और प्रशासन की निष्क्रियता को भी उजागर किया है।

