रीवा: विवादों में घिरे जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन को हटाया गया, ग्वालियर मुख्यालय अटैच
शराब ठेकों में अनियमितता, नियमों की अनदेखी और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप
रीवा जिले के जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन को अंततः शासन ने पद से हटा दिया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से ग्वालियर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई उनके ऊपर लगातार लग रहे गंभीर आरोपों — जिनमें शराब ठेकेदारों को अनैतिक लाभ पहुंचाना, ठेकों के आबंटन में पारदर्शिता का अभाव, और विभागीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने जैसे मामले शामिल हैं — के चलते की गई है।
शराब कारोबारियों से सांठगांठ के आरोप
सूत्रों के अनुसार, अनिल जैन पर आरोप है कि उन्होंने जिले के कुछ चुनिंदा शराब ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की। आबकारी नियमों को ताक पर रखकर उन्हें विशेष छूटें दी गईं, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। यह भी कहा जा रहा है कि विभाग के अंदरूनी दस्तावेजों व निरीक्षण रिपोर्टों में ठेके संचालन में घोर अनियमितताएं उजागर हुईं थीं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जताई थी आपत्ति
अनिल जैन के कार्यकाल को लेकर कई बार स्थानीय विधायकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी। कुछ महीनों पूर्व रीवा नगर और मऊगंज क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। शिकायतें मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और आबकारी आयुक्त कार्यालय तक पहुंच चुकी थीं, जिनमें भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप स्पष्ट रूप से दर्ज थे।
शासन ने लिया संज्ञान, उच्चस्तरीय रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो रीवा कलेक्टर और संभागीय आयुक्त को भी लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसके बाद शासन स्तर पर एक गोपनीय जांच करवाई गई, जिसमें अनिल जैन की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उसी के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से रीवा से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में उनके खिलाफ विभागीय जांच भी प्रारंभ हो सकती है।
अवैध शराब के खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही की मांग
रीवा और मऊगंज जिले में पिछले कुछ वर्षों से अवैध शराब कारोबार चरम पर रहा है। इसके खिलाफ कार्यवाही की मांग आम जनता से लेकर जनप्रतिनिधियों तक द्वारा की जाती रही है। अब अनिल जैन की पदस्थापना हटने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि शासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएगा और दोषियों पर कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।
जिम्मेदार प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों की मिलीभगत यदि भ्रष्ट तंत्र को पोषित करती है, तो उसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। रीवा जिले में आबकारी विभाग से जुड़े इस घटनाक्रम ने यही सवाल खड़ा किया है — क्या शासन अब केवल स्थानांतरण तक सीमित रहेगा, या दोषियों पर कानूनी कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाएगी?
— रिपोर्ट: विंध्य वसुंधरा समाचार, रीवा

