राजनीतिक संरक्षण में दबंगों का तांडव — पुलिस की मौजूदगी में पीटते रहे, प्रशासन चुप
रीवा जिले में ज़मीन विवाद बना जानलेवा संकट — पीड़ित परिवार 5 वर्षों से भटक रहा, अब तक नहीं मिला न्याय
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा/ मऊगंज मध्यप्रदेश
रीवा जिले के गढ़ थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत मदरी में एक भूमि विवाद अब जानलेवा हिंसा में तब्दील हो चुका है। स्थानीय दबंगों ने खुलेआम, दिनदहाड़े, पीड़ित अजय शुक्ला और उनके परिवार को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा — वह भी पुलिस की मौजूदगी में। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस हमले के बाद भी पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसने प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण की परतें खोल दी हैं।
पांच वर्षों से न्याय की गुहार, अब जान पर बन आई
पीड़ित अजय शुक्ला पिता रामविशाल शुक्ला, निवासी ग्राम मदरी, बीते 5 वर्षों से अपनी दो एकड़ पुश्तैनी जमीन (खसरा नंबर 6/1/1 रकबा 1.603 हे. और 6/2 रकबा 1.618 हे.) को लेकर प्रशासन और न्यायालयों में चक्कर काट रहे हैं। उनके पास वैध दस्तावेज, भू-अधिकार पुस्तिका, और न्यायालयीन आदेश तक मौजूद है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि वह उक्त भूमि पर कब्जा कर सकते हैं।
लेकिन स्थानीय रसूखदार राकेश शुक्ला, अवधेश प्रसाद गर्ग, गौरभ शुक्ला, शिवम शुक्ला और उनके सहयोगी, कथित रूप से राजनीतिक संरक्षण के बल पर अजय शुक्ला को जमीन पर क़ब्जा नहीं करने दे रहे हैं। उल्टे बार-बार धमकियां दे रहे हैं, और अब तो खुलेआम हमला करने पर उतारू हो गए हैं।
दिनदहाड़े तांडव — महिला-बच्चों के सामने की गई बर्बरता
पीड़ित अजय शुक्ला अपनी पत्नी सुमन शुक्ला और बच्चों के साथ जब अपने खेत पर पहुंचे, तो उनके पास प्रशासनिक आदेश की प्रति और भूमि संबंधी दस्तावेज मौजूद थे। लेकिन तभी विपक्षी पक्ष के लोग वहाँ आ धमके और गालियाँ बकते हुए हमला कर दिया।
हमलावरों ने—
लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला किया
बच्चों और पत्नी के सामने बर्बर पिटाई की
जान से मारने की धमकियां दीं
गांव की सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर मारा
पूरा घटनाक्रम मोबाइल में रिकॉर्ड हुआ और अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिससे जनआक्रोश और प्रशासनिक सवालों की लहर उठ खड़ी हुई है।
राजनीतिक दबाव का असर — पुलिस मौन, प्रशासन निष्क्रिय
पीड़ित अजय शुक्ला ने बताया कि—
"मैंने अब तक थाना गढ़ और चौकी लालगांव में 14 बार शिकायत दर्ज कराई है।
181 सीएम हेल्पलाइन पर 15 बार गुहार लगाई है।
लेकिन हर बार सिर्फ कागजी खानापूर्ति हुई।
जमीन तो नहीं ही मिली, अब तो मेरी जान भी खतरे में है।"
उन्होंने प्रशासन से सवाल किया:
"जब पुलिस की मौजूदगी में मुझे मारा गया और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई —
तो फिर कानून किसके लिए है? क्या हम सिर्फ वोट देने के लिए रह गए हैं?"
प्रशासन की चुप्पी — किसकी शह पर बढ़ रहे हौसले?
आरोपियों पर पहले से कई शिकायतें, फिर भी कोई गिरफ्तारी नहीं
पुलिस थाने और चौकी में पूरी जानकारी, फिर भी कोई कार्यवाही नहीं
क्या दबंगों को सत्ताधारी दल के नेताओं का संरक्षण प्राप्त है?
यह सिर्फ एक ज़मीन विवाद नहीं, प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के राज पर गहरी चोट है।
यदि अब भी नहीं जागा प्रशासन — तो यह मामला बनेगा रीवा जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता
रीवा जिले में पहले से कई भूमि विवाद प्रशासनिक लापरवाही के कारण विस्फोटक रूप ले चुके हैं।
यदि अब भी पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय नहीं मिला, तो यह मामला प्रशासन, पुलिस और न्याय व्यवस्था — तीनों की विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान बन जाएगा।







