लक्ष्मण बाग भूमि विवाद: कैबिनेट की मंजूरी बिना शुरू हुआ निर्माण, एडवोकेट बी.के. माला ने शासन-आयुक्त को दी शिकायत”
कैबिनेट की मंजूरी बिना लक्ष्मण बाग भूमि पर निर्माण कार्य शुरू, उठे सवाल
रीवा के धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर लक्ष्मण बाग संस्थान की भूमि को लेकर शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब तक शासन ने न तो भूमि हस्तांतरण का कोई आदेश जारी किया है और न ही प्रदेश कैबिनेट से इस संबंध में मंजूरी प्राप्त की गई है। इसके बावजूद लक्ष्मण बाग परिसर में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों और आस्था से जुड़े संगठनों में गहरी नाराजगी व्याप्त है।
प्रक्रिया को दरकिनार कर शुरू हुआ निर्माण
1. शासन के रिकॉर्ड में लक्ष्मण बाग संस्थान की भूमि अभी भी ट्रस्ट के नाम दर्ज है।
2. संस्कृत संस्थान या किसी अन्य विभाग को भूमि हस्तांतरण की औपचारिक मंजूरी कैबिनेट स्तर पर नहीं दी गई है।
3. न ही अब तक विधिवत जमीन बदलानामा (लैंड एक्सचेंज) की कार्रवाई पूरी की गई है।
4. इसके बावजूद निर्माण कार्य का प्रारंभ नियमों और स्थापित परंपरा का उल्लंघन माना जा रहा है।
शिकायत शासन और आयुक्त को
इस संबंध में बी.के. माला एडवोकेट, रीवा ने शासन स्तर और संभागायुक्त रीवा को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में कहा गया है कि—
जब तक शासन से जमीन का बदलानामा नहीं होता और लक्ष्मण बाग संस्थान को इसके बदले बाजार मूल्य की जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण रोकना जरूरी है।
संविधान और ट्रस्ट की नियमावली राष्ट्रपति से अनुमोदित है, इसलिए भूमि हस्तांतरण से पूर्व उसका अवलोकन और अनुपालन अनिवार्य है।
कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार का कार्यवाही करना नियम विरुद्ध और अवैधानिक होगा।
धार्मिक महत्व और अयोध्या जैसी पहचान की मांग
लक्ष्मण बाग संस्थान को केवल एक साधारण संपत्ति नहीं बल्कि आस्था का केंद्र बताते हुए शिकायत में कहा गया है कि—
यह तपोभूमि भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण जी से जुड़ी है, जहाँ उनकी आराधना और स्मृतियाँ आज भी जीवित हैं।
परिसर में चारों धाम से जुड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं
इस स्थान को अयोध्या की तर्ज पर धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा तीर्थ स्थल और पर्यटन केंद्र बन सके।
लोगों की अपेक्षाएँ
स्थानीय श्रद्धालु और धार्मिक संगठन मांग कर रहे हैं कि शासन इस भूमि के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण या निर्माण संबंधी निर्णय लेने से पहले—
1. लक्ष्मण बाग संस्थान के संविधान और ट्रस्ट नियमावली का अवलोकन करे।
2. संस्थान को वैकल्पिक और समतुल्य भूमि उपलब्ध कराए।
3. जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लक्ष्मण बाग का विकास धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से किया जाए।

