₹8800 का मनरेगा रजिस्टर!😮 उमरिया व्योहरियान जनपद पंचायत नईगढ़ी का कारनामा, भ्रष्टाचार की परतें खोलीं
ग्राम पंचायतों में छोटे-छोटे बिलों के बहाने कैसे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पनप रहा है, इसका ताजा और शर्मनाक उदाहरण सामने आया है। नईगढ़ी जनपद पंचायत की उमरिया व्योहरियान ग्राम पंचायत ने पंचायत दर्पण पोर्टल पर ऐसा बिल अपलोड किया है जिसने प्रशासन की पारदर्शिता के दावों की पोल खोल दी है।
8800 रुपये में एक मनरेगा रजिस्टर!
गांव की एक सामान्य दुकान – प्रकाश ऑनलाइन एवं किराना स्टोर – द्वारा पंचायत को मनरेगा लेजर रजिस्टर की सप्लाई दिखाई गई है। बिल में उल्लेख है कि सिर्फ एक रजिस्टर पंचायत को ₹8800 में बेचा गया।
बिल का ब्यौरा –
दुकान – प्रकाश ऑनलाइन एवं किराना स्टोर
वस्तु – मनरेगा लेजर रजिस्टर
मात्रा – 1
दर – ₹8800
कुल – ₹8800
सील – नहीं
GST नंबर – नहीं
हस्ताक्षर – अधूरा
बिना सील, बिना जीएसटी नंबर और बिना हस्ताक्षर का यह बिल कैसे भुगतान योग्य मान लिया गया, यह अपने आप में घोटाले का पक्का सबूत है।
प्रदेशव्यापी भ्रष्टाचार का सिलसिला
यह कोई अकेला मामला नहीं है। मध्य प्रदेश में आए दिन हर जिले में नए-नए घोटाले उजागर हो रहे हैं। शहडोल के बाद अब सबसे बड़ा खुलासा नवीन जिला मऊगंज में सामने आया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह रजिस्टर कागज का बना है या किसी महंगी धातु का, जिसकी कीमत 8800 रुपये तक बताई गई है?
यह तो जांच का विषय है, लेकिन फिलहाल हालात यह दर्शाते हैं कि पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार की ऐसी पराकाष्ठा हो चुकी है जिसने कांग्रेस के पिछले रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिए हैं। ना नीति है, ना नियत है—बस आर्थिक समृद्धि का प्रयास और भ्रष्टाचार की बेलगाम दौड़।
मनरेगा की असलियत पर सवाल
मनरेगा योजना में वास्तविकता क्या है, यह किसी से छिपी नहीं।
अगर आज कोई भी मनरेगा रजिस्टर खोले तो उसमें जेसीबी मशीनों का नाम नहीं मिलेगा, लेकिन गांव में वही मशीनें काम करती दिखेंगी।
अगर किसी भी काम की एक हफ्ते की सीसीटीवी फुटेज जांची जाए, तो असली स्थिति सामने आ जाएगी।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जांच करेगा कौन?
गांव की कहावत है – “सैयाँ भय कोटवार तो डर काहे का” – यही कहावत यहां चरितार्थ हो रही है।
जनता और सोशल मीडिया में आक्रोश
पंचायत दर्पण पर अपलोड इस बिल की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल है। लोग तंज कस रहे हैं –
“क्या इस रजिस्टर में सोने की तार जड़ी है?”
“या फिर यह प्रधान-सचिव की भ्रष्ट डायरी है?”
“अगर एक रजिस्टर 8800 का है तो करोड़ों की योजनाओं में कितना खेल हो रहा होगा?”
जवाबदेही तय होनी चाहिए
अब जनता यह जानना चाहती है –
1. क्या पंचायत सचिव और सरपंच पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होगा?
2. क्या इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या लोकायुक्त को सौंपी जाएगी?
3. क्या जिला प्रशासन ऐसे मामलों में सस्पेंशन और जेल भेजने की कार्रवाई करेगा, या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
यह मामला सिर्फ उमरिया व्योहरियान पंचायत तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की भ्रष्ट तंत्र व्यवस्था का आईना है। वायरल रसीद सच है या गलत—यह तो जांच से ही साबित होगा, लेकिन सवाल उठाना जनता का हक है और कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी।

