✍️ जनता की आवाज़ : “कलेक्टर हटाओ, सीधी बचाओ”
सीधी। जिले की जनता भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही से आजिज आ चुकी है। हर विभाग में गड़बड़ियों और मनमानी की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन कार्रवाई कहीं नहीं हो रही। लोगों का आरोप है कि जिले के कलेक्टर न तो जनता से संवाद कर रहे हैं और न ही विभागीय भ्रष्टाचार की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। इस कारण आम जनता ने अब मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधी हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
🏥 जिला अस्पताल बना भ्रष्टाचार का गढ़
जिला अस्पताल में मरीजों को समय पर दवाइयाँ नहीं मिल रही हैं।
इलाज और बिलिंग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं।
गरीब और जरूरतमंद मरीज योजनाओं का लाभ लेने के बजाय दलालों के चक्कर में फँस रहे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि सिविल सर्जन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बावजूद कार्रवाई ठप है। FIR दर्ज करने के आदेश हुए, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। उल्टा सिविल सर्जन ने कलेक्टर को ही चुनौती देकर प्रशासन की साख पर सवाल खड़े कर दिए।
📞 जनता से दूरी, जनसुनवाई औपचारिकता
समाजसेवियों और पत्रकारों का आरोप है कि कलेक्टर जनता से दूरी बनाए रखते हैं।
शिकायत करने वाले नागरिकों के फोन तक ब्लैकलिस्ट कर दिए जाते हैं।
जनसुनवाई महज़ औपचारिकता बनकर रह गई है।
लोग उम्मीद लेकर पहुँचते हैं, लेकिन निराश होकर लौट आते हैं।
⚖️ जनता का सवाल
लोगों का कहना है कि जब जिले का सर्वोच्च अधिकारी ही समस्याओं से आँखें मूँद ले तो फिर न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
कई बार लिखित शिकायतें और ज्ञापन दिए गए, लेकिन नतीजा सिर्फ शून्य रहा। अब यह पीड़ा असहनीय हो चुकी है।
📢 मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
नाराज़ नागरिकों और समाजसेवियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र भेजकर साफ मांग रखी है कि –
1️⃣ कलेक्टर अपनी कार्यशैली और रवैये में तत्काल बदलाव लाएँ।
2️⃣ अन्यथा उन्हें जिले से हटाकर यहाँ एक ईमानदार और संवेदनशील अधिकारी नियुक्त किया जाए।
✊ जनता की चेतावनी
लोगों ने साफ कहा है कि अब वे सिर्फ कागज़ी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होंगे। अगर उनकी आवाज़ को अनसुना किया गया तो आंदोलन सीधी से भोपाल तक पहुँचाया जाएगा और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने में भी वे पीछे नहीं हटेंगे।

