एबीपी न्यूज़ पर कानूनी नोटिस, माफी और वीडियो हटाने की मांग
देश की प्रमुख मीडिया संस्था एबीपी न्यूज़ नेटवर्क प्रा. लि. और इसकी एंकर प्रतिमा मिश्रा को एक गंभीर कानूनी नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अक्षत बाजपाई द्वारा उनके मुवक्किल शुभम शर्मा की ओर से भेजा गया है।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 9 सितम्बर 2025 को प्रसारित हुए कार्यक्रम “भारत की बात” में एंकर प्रतिमा मिश्रा द्वारा दिए गए वक्तव्य साम्प्रदायिक रूप से विभाजनकारी (Communally Divisive Remarks) थे। इन टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और समाज में अशांति फैलने की संभावना जताई गई है।
नोटिस की प्रमुख मांगें
1. सार्वजनिक माफी (Public Apology): एबीपी न्यूज़ और एंकर प्रतिमा मिश्रा से तत्काल सार्वजनिक मंच पर माफी मांगने की मांग की गई है।
2. वीडियो हटाने की मांग: कार्यक्रम के प्रसारण से जुड़े सभी वीडियो और क्लिप्स को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तत्काल हटाने को कहा गया है।
3. भविष्य में सावधानी: ऐसे कार्यक्रम या टिप्पणियां दोबारा न हों, इसके लिए संस्थागत स्तर पर ठोस कदम उठाने की अपेक्षा की गई है।
पृष्ठभूमि: नेपाल में "Gen Z Protest"
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि सितंबर 2025 में नेपाल में बड़े पैमाने पर "Gen Z Protest" हुए थे।
यह आंदोलन मुख्य रूप से छात्रों और युवाओं द्वारा चलाया गया।
विरोध का कारण था:
भ्रष्टाचार,
सरकारी धन का दुरुपयोग,
अधिकारियों और उनके परिवारों की ऐशोआराम भरी जीवनशैली,
और सार्वजनिक कोष के दुरुपयोग के गंभीर आरोप।
नोटिस के अनुसार, जब 4 सितम्बर 2025 को नेपाल सरकार की ओर से इस मामले पर नियंत्रण पाने की कोशिशें विफल रहीं, तब असंतोष और बढ़ गया। इस पृष्ठभूमि में, एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में की गई कथित "विभाजनकारी टिप्पणी" ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।
संभावित परिणाम
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चैनल और एंकर प्रतिमा मिश्रा इस नोटिस का जवाब नहीं देते या मांगी गई माफी और वीडियो हटाने की कार्रवाई नहीं करते, तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है। इस स्थिति में चैनल पर मानहानि (Defamation) और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने जैसे आरोपों के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
मीडिया जगत में हलचल
यह नोटिस जारी होने के बाद मीडिया जगत में खलबली मच गई है। एक तरफ प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल उठ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह बहस भी तेज हो गई है कि समाचार चैनलों को संवेदनशील विषयों पर कितनी सतर्कता बरतनी चाहिए।

