खाद संकट पर किसानों का गुस्सा फूटा, रीवा करहिया मंडी में पुलिस का लाठीचार्ज
भूखे-प्यासे 24 घंटे लाइन में लगे अन्नदाताओं को मिली लाठियां, कई किसान घायल – काला बाज़ार और प्रशासन की लापरवाही उजागर
कभी विंध्य प्रदेश की राजधानी रही रीवा आज एक बार फिर बर्बर पुलिस कार्रवाई का गवाह बनी। बुधवार की सुबह करहिया मंडी में यूरिया खाद के लिए लंबी कतार में खड़े किसानों पर पुलिस ने बेरहमी से लाठियां भांजी। कई अन्नदाता घायल हो गए। किसानों ने इस बर्बरता की तुलना अंग्रेजी शासनकाल के अत्याचारों से की, जब स्वतंत्रता सेनानियों और आम जनता को बेमुरव्वत पीटा जाता था।
भूखे-प्यासे 24 घंटे खड़े रहे किसान
रीवा जिले में एक महीने से यूरिया खाद का संकट बना हुआ है। शहर से लेकर गांव-गांव तक किसान भूखे-प्यासे 24 घंटे पहले से लाइन में लगे रहते हैं। मंगलवार की सुबह से ही महिला और पुरुष किसान करहिया मंडी में खाद पाने के लिए खड़े थे। लेकिन बुधवार की सुबह तक 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उन्हें खाद का टोकन नहीं मिला।
स्थिति बिगड़ने पर किसानों ने उग्र आंदोलन शुरू किया, लेकिन उनकी समस्या सुनने के बजाय पुलिस ने उन पर लाठियां बरसाना शुरू कर दीं। इस दौरान कई किसान घायल हुए। किसानों का आरोप है कि यह घटना भाजपा सरकार की शह पर हुई और सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पुलिस ने खुलेआम अन्नदाताओं के साथ दुर्व्यवहार किया।
“अन्नदाता सबसे बड़ा अपराधी बन गया?”
सूत्रों के मुताबिक, कोतवाली थाने के निरीक्षक श्रृंगेश सिंह राजपूत और उनके पुलिसकर्मियों ने किसानों पर इस तरह लाठियां बरसाईं जैसे खाद लेने के लिए लाइन में लगना कोई अपराध हो। किसानों ने सवाल उठाया –
“क्या अन्नदाता सबसे बड़ा गुनहगार बन गया है? जो किसान पूरे देश का पेट भरता है, उसे सरकार की नाकामी का शिकार होकर लाठियां खानी पड़ रही हैं।”
खाद वितरण में बड़ा खेल
किसानों ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से प्रयागराज होते हुए चाकघाट टोल प्लाजा के रास्ते खाद की बोरियां अवैध रूप से लाई जा रही हैं। सीसीटीवी फुटेज में मोटरसाइकिल, टेम्पो और अन्य वाहनों पर खाद ढोने के दृश्य भी सामने आए हैं। बाजार में खुलेआम 700 से 800 रुपए प्रति बोरी की दर से खाद बेची जा रही है, जबकि सरकार इस पर भारी सब्सिडी देती है।
किसानों का कहना है कि यह पूरा खेल इसीलिए रचा गया है ताकि सब्सिडी बचाई जा सके और खाद काला बाज़ार में मोटे दामों पर बिके।
राजनीतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
अब जिले की राजनीति भी गरमा गई है। किसान पूछ रहे हैं कि आखिर वे जनप्रतिनिधि कहाँ हैं, जो हर मंच पर किसानों की आवाज उठाने का दावा करते हैं? विधायक, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस बर्बरता पर क्या रुख अपनाते हैं, यह आने वाला समय तय करेगा।
किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष रीवा, निपेंद्र सिंह पिंटू ने घटना की निंदा करते हुए कहा –
“किसान अपनी मेहनत से इस देश का पेट भरते हैं, और बदले में उन्हें लाठियां मिल रही हैं। यह लोकतंत्र नहीं, किसानों के साथ अन्याय है। सरकार को तुरंत अवैध खाद आपूर्ति और काला बाज़ारी पर रोक लगानी चाहिए, अन्यथा हालात और बिगड़ेंगे।”


