दबंगई के आगे बेबस विकास: सांसद निधि से बनी सड़क ट्रैक्टर से जोती, सरपंच-सचिव को धमकी
ग्रामीण अंचलों में सड़क का महत्व वही लोग समझते हैं, जिन्होंने वर्षों तक कीचड़ और गड्ढों से होकर सफर किया है। जब किसी गांव में पहली बार सड़क बनती है, तो वहां के लोग इसे जीवनरेखा मानते हैं। लेकिन दुर्भाग्य देखिए, जहां सड़कें बनती हैं, वहीं कुछ दबंग लोग अपनी मनमानी और अहंकार के चलते इन्हें बर्बाद कर देते हैं।
ऐसा ही ताज़ा मामला जनपद पंचायत गंगेव की ग्राम पंचायत डागरदुआ के ग्राम कोलहा से सामने आया है।
सांसद निधि से बनी थी बहुप्रतीक्षित सड़क
ग्राम पंचायत डागरदुआ के सरपंच आरती सेन ने बताया कि हरिजन बस्ती तक जाने वाली सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत सांसद निधि से जून 2025 में कराया गया था। ग्रामीण लंबे समय से इस सड़क की मांग कर रहे थे, क्योंकि यह मार्ग बच्चों के स्कूल, किसानों की मंडी और बीमारों के अस्पताल तक पहुंचने का एकमात्र जरिया था।
दबंग ने ट्रैक्टर से सड़क की जुताई कर दी
लेकिन6 सितंबर 2025 की दोपहर लगभग 3:30 बजे गांव के ही दबंग हरीश द्विवेदी पिता राजेंद्र द्विवेदी ने अपने ट्रैक्टर से इस सड़क को जोत डाला। देखते ही देखते नई बनी सड़क खेत की तरह दिखने लगी और मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गई। ग्रामीणों ने जब विरोध करना चाहा तो दबंग ने सरपंच और सचिव को खुलेआम धमकियां दीं।
सरपंच ने गढ़ थाने में दी शिकायत
इस घटना से आहत होकर सरपंच आरती सेन (पति राहुल सेन) ने गढ़ थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सांसद निधि से बनी सार्वजनिक सड़क को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है, जो न केवल कानूनन अपराध है बल्कि गांव के विकास पर हमला भी है। सरपंच ने दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की नाराजगी, फिर से पुराने हालात
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद पहली बार उन्हें बारिश और कीचड़ से राहत मिली थी। बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचना आसान हो गया था और किसान अपनी फसल मंडी तक ले जाने में सक्षम हो पाए थे। अब सड़क बर्बाद होने के बाद हालात फिर से पुराने जैसे हो गए हैं। लोग पैदल भी निकलने से डर रहे हैं क्योंकि सड़क अब गड्ढों और कीचड़ में बदल चुकी है।
प्रशासन पर सवाल
गांववालों ने सवाल उठाया है कि आखिर दबंग लोग इस तरह खुलेआम विकास कार्यों को नुकसान कैसे पहुंचा रहे हैं? क्या प्रशासन केवल शिकायत दर्ज करने तक ही सीमित रहेगा या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
जनहित का सवाल
यह घटना केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे अंचल के लिए चेतावनी है। यदि सांसद निधि जैसी योजनाओं से बनी सड़कों को दबंग लोग बर्बाद करते रहेंगे, तो करोड़ों की लागत से होने वाले विकास कार्य व्यर्थ हो जाएंगे और जनता को फिर से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा।
गांव में सड़क विकास की सबसे पहली पहचान होती है। यदि उसे ही बर्बाद कर दिया जाए, तो यह सीधे-सीधे जनता के हक पर कुठाराघात है। प्रशासन को अब यह साबित करना होगा कि कानून दबंगई से बड़ा है।






