रीवा मऊगंज जिलों में आदेश और हकीकत में बड़ा अंतर : सड़क पर आवारा मवेशी बने हादसों की वजह
एक तरफ जिला प्रशासन ने आवारा मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए आदेश जारी किया है, वहीं दूसरी ओर हकीकत यह है कि आदेशों का पालन जमीन पर कहीं नजर नहीं आ रहा है।
📌 कलेक्टर मऊगंज का आदेश
दिनांक 4 सितम्बर 2025 को कलेक्टर मऊगंज ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि गौ-वंश सड़कों पर घूमते हैं, जिससे आए दिन सड़क दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं। वाहन चालक और आम नागरिक हादसों का शिकार बनते हैं, वहीं किसानों की फसलें भी चौपट हो जाती हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए जनपद पंचायत, नगर परिषद और संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया कि गौ-वंश को सुरक्षित स्थलों (गौशालाओं) में रखा जाए और रोज़गार सहायकों एवं सचिवों के माध्यम से इनकी जानकारी इकट्ठा कर कार्यवाही की जाए।
📌 जमीनी हकीकत
लेकिन प्रशासन के आदेशों की पोल कुछ ही दिनों बाद खुल गई। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि मऊगंज कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही आवारा मवेशियों का जमावड़ा है। रात 9 बजे का समय और दर्जनों मवेशी सड़क पर बैठकर यातायात को बाधित कर रहे हैं। यह न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि आदेश सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गए हैं।
📌 खतरे की घंटी
आवारा पशुओं की वजह से आए दिन जिले में सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। वाहन चालक अचानक सड़क पर बैठे या दौड़ते पशुओं से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे सामने आते हैं। स्थिति यह है कि जिन विभागों को जिम्मेदारी दी गई है, वे सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं।
📌 जनता में रोष
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक आदेशों का पालन कड़ाई से होता, तो कलेक्ट्रेट जैसी संवेदनशील जगह पर मवेशियों का जमावड़ा कभी न दिखता। यह सीधा संकेत है कि नीचे तक निर्देशों की अनदेखी की जा रही है।
📌 प्रशासन की जिम्मेदारी
अब सवाल यह उठता है कि क्या आदेश सिर्फ फाइलों में ही चलते रहेंगे या जमीन पर भी कार्रवाई होगी? यदि प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से कार्यवाही नहीं की गई, तो मवेशियों के कारण होने वाले हादसे लगातार बढ़ते रहेंगे और जनता को ही इसकी कीमत अपनी जान और संपत्ति से चुकानी होगी।
कलेक्टर का आदेश और जमीनी हकीकत दोनों आमने-सामने खड़े हैं। एक तरफ कागजों पर व्यवस्था सुधारने के निर्देश, वहीं दूसरी ओर कलेक्ट्रेट के गेट पर ही आदेशों की धज्जियां उड़ाती तस्वीर। यह स्पष्ट संदेश है कि जब तक प्रशासन अमल में कड़ाई नहीं बरतेगा, तब तक आवारा मवेशियों की समस्या जस की तस बनी रहेगी।


