जिला पंचायत रीवा में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा कार्यपालन यंत्री का वीडियो वायरल, बोले – “पैसे लेकर फाइलें दबा देते हैं अधिकारी”
रीवा जिला पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामिण यांत्रिकी सेवा क्रमांक-2 के कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्होंने खुद जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि “यहां अधिकारी पैसे लेकर फाइलों को दबा देते हैं और जांच की प्रक्रिया को प्रभावित कर देते हैं।”
भ्रष्टाचार की परतें उजागर
कार्यपालन यंत्री के इस बयान ने जिले की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यदि कोई शिकायत या जांच होती है तो अधिकारी और कर्मचारी पैसे लेकर फाइल को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। नतीजा यह होता है कि ग्रामीणों और आम नागरिकों की genuine शिकायतें वर्षों तक लटक जाती हैं और उन्हें न्याय नहीं मिल पाता।
योजनाओं पर भी पड़ रहा असर
जिला पंचायत के अधीन ग्रामीण विकास, मनरेगा, जल-जीवन मिशन और पंचायतों की बुनियादी योजनाएं आती हैं। यदि भ्रष्टाचार का यह आलम है तो यह निश्चित है कि इन योजनाओं का लाभ ग्रामीण अंचलों तक सही ढंग से नहीं पहुंच पा रहा। गरीब और किसान, जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई हैं, वे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं।
जनता और जनप्रतिनिधियों में रोष
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जिला पंचायत का दफ्तर भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है, जहां बिना पैसे दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। इससे गांवों में विकास कार्य ठप हो रहे हैं।
प्रशासन पर सवालिया निशान
इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कार्यपालन यंत्री जैसे जिम्मेदार अधिकारी खुद भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं, तो यह साफ है कि तंत्र के भीतर भ्रष्टाचार गहराई तक फैला हुआ है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जिला पंचायत कार्यालय की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।


