Breaking News: जिला पंचायत रीवा की पोल खोलने वाले कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की तलवार
जिला पंचायत रीवा में भ्रष्टाचार और दलाली का आरोप लगाने वाले कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) संभाग क्रमांक-02, एस.बी. रावत पर अब विभागीय कार्यवाही की गाज गिरने वाली है। रावत के एक वायरल वीडियो ने प्रशासनिक हलकों में भूचाल मचा दिया था, जिसमें उन्होंने जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को “दलाल” और “घूसखोर” कहकर संबोधित किया।
सीईओ ने जारी किया कारण बताओ सूचना पत्र
रीवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने 10 सितम्बर 2025 को पत्र क्रमांक 3541/जि.पं./स्था./2025 जारी करते हुए एस.बी. रावत से जवाब तलब किया। पत्र में कहा गया कि वायरल वीडियो में रावत ने गंभीर आरोप लगाए हैं—
- जाँच के नाम पर अधिकारियों द्वारा जानबूझकर फाइलें उलझाई जाती हैं।
- दलाली और पैसों के लेन-देन से कार्यवाही प्रभावित होती है।
- “पैसा लेकर दो लाइन लिखते हैं, उपस्थित नहीं था, जाँच दूसरे से कराओ” जैसे हथकंडे अपनाए जाते हैं।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि इन आरोपों से विभाग की छवि धूमिल हुई है। इसलिए रावत को 11 सितम्बर 2025 दोपहर 3 बजे तक जवाब देने के लिए तलब किया गया था। चेतावनी भी दी गई कि जवाब न मिलने पर मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
रावत ने माँगा समय, पर जवाब अब तक लंबित
सूत्रों के अनुसार, कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत ने सीईओ को पत्र लिखकर एक सप्ताह का समय माँगा था। हालांकि, निर्धारित समयसीमा निकल जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस जवाब विभाग को नहीं मिला है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही तेज हो सकती है।
सवाल बड़ा: भ्रष्टाचार पर बोलने की सजा?
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीति और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी का कहना है कि “एस.बी. रावत ने जो भी कहा है, वह हकीकत है।”
उन्होंने बताया कि मप्र पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89, 40 और 92 के तहत दर्ज प्रकरणों की फाइलें इसका प्रमाण हैं—
- एक ही प्रकरण में बार-बार जाँच कराई जाती है।
- वसूली की राशि जाँच रिपोर्ट बदलकर कम कर दी जाती है।
- कभी फर्जी मूल्यांकन, कभी सीसी के नाम पर, तो कभी अपूर्ण कार्य के बहाने वसूली को विलोपित कर दिया जाता है।
द्विवेदी ने गंगेव जनपद की सेदहा, चौरी, बांस पंचायत तथा जनपद नईगढ़ी की जिलहंडी पंचायत का उदाहरण देते हुए बताया कि जहाँ पहले जाँच में 68 लाख की वसूली आई थी, उसे घटाकर मात्र 56 हजार कर दिया गया। इन मामलों में शिकायतकर्ताओं ने अब हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है, जिसके निर्देश पर मऊगंज कलेक्टर स्तर पर जाँच जारी है।





