Breaking:// हिनौती में श्रीमद भागवत कथा का छठा दिवस
शुद्ध जीव का ब्रह्म से विलास ही रास है – आचार्य रमाशंकर महाराज श्रीकृष्ण कामरहित परमात्मा हैं, रासलीला काम पर विजय की लीला है
लालगांव हिनौती क्षेत्र स्थित श्री शारदा देवी मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण कथा महायज्ञ का छठा दिन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। कथा के प्रमुख वक्ता आचार्य रमाशंकर महाराज ने दसवें स्कंध की व्याख्या करते हुए रासलीला का गूढ़ रहस्य उद्घाटित किया।
कथा स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का ऐसा प्रवाह उमड़ा कि पूरा वातावरण “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” के जयकारों से गुंजायमान रहा। जैसे-जैसे कथा अपने चरम पर पहुँची, भक्तों का जनसैलाब बढ़ता गया। आसपास के ग्राम—कैथा, करहिया, भठवा, मदरी, अगडाल, पडुआ, लोटनी, कठमना, सेदहा, बड़ोखर, पनगड़ी, पताई, अतरैला, डाढ़, सर्रा, नेवरिया कटरा, कलवारी, गढ़, लालगांव सहित अन्य गांवों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुँचे। भी
दसवें स्कंध का रसपान
आचार्य जी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।
बाललीलाएँ: माखन चोरी, ग्वाल-बालों के साथ खेल और ममतामयी यशोदा की ममता।
ब्रह्मा मोह: ब्रह्माजी का अहंकार और श्रीकृष्ण द्वारा उसका निवारण।
इंद्रयज्ञ निवारण व गोवर्धन धारण: देवताओं पर भी श्रीकृष्ण की सर्वोच्चता।
चीरहरण प्रसंग: गोपियों को शिक्षा और धर्म की स्थापना।
रासलीला एवं काम विजय: जीव और ब्रह्म का दिव्य मिलन।
कंस वध: अधर्म पर धर्म की विजय का उद्घोष।
रासलीला: शुद्ध जीव और ब्रह्म का मिलन
आचार्य रमाशंकर महाराज ने कहा—
“रासलीला कोई लौकिक प्रेमकथा नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के निर्विकार मिलन की दिव्य लीला है। शुद्ध जीव का ब्रह्म के साथ विलास ही रास है। यह चिंतन योग्य है, अनुकरण योग्य नहीं।”
उन्होंने समझाया कि रासलीला के तीन प्रमुख तत्व हैं—
1. इसमें गोपियों के शरीर का कोई महत्व नहीं।
2. इसमें लौकिक कामवासना का अंश मात्र नहीं।
3. यह साधारण स्त्री-पुरुष का प्रेम नहीं, बल्कि जीव और ईश्वर का आध्यात्मिक संगम है।
कामदेव का पराभव – काम विजय की लीला
रासलीला प्रसंग में आचार्य जी ने बताया कि कामदेव ने भी श्रीकृष्ण को परास्त करने का प्रयास किया।
शरद पूर्णिमा की रात को जब रासलीला प्रारंभ हुई, तब कामदेव ने अपने कामबाण चलाए। परंतु उनका कोई प्रभाव श्रीकृष्ण पर नहीं पड़ा।
“श्रीकृष्ण कामरहित परमात्मा हैं। वह साक्षात ब्रह्म हैं। कामदेव उनके सामने परास्त हो गया और उसका अहंकार चूर हो गया।”
आचार्य जी ने इसे “काम पर विजय की लीला” बताते हुए कहा कि रासलीला के माध्यम से श्रीकृष्ण ने यह संदेश दिया कि आत्मा तभी परमात्मा तक पहुँच सकती है जब वह काम, क्रोध, मोह और लोभ से मुक्त हो।
रासलीला: पारलौकिक, अलौकिक और आध्यात्मिक
आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि—
रासलीला शाब्दिक और लौकिक न होकर पारलौकिक और आध्यात्मिक है।
यह पंचप्राणों के ईश्वर से मिलन का प्रतीक है।
सांसारिक बुद्धि इसे कामलीला समझती है, जबकि इसकी वास्तविकता आत्मा-परमात्मा का दिव्य संगम है।
“जो काम पर विजय पा लेता है, वही काल पर विजय पा लेता है।”
मौसम के कारण भंडारे की तिथि बदली
आयोजक मंडल ने जानकारी दी कि भंडारे का कार्यक्रम, जो पूर्व में 2 सितंबर 2025 को रखा गया था, अब मौसम को देखते हुए 3 सितंबर (बुधवार) को आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर क्षेत्रभर के श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।






