📰 गढ़- राष्ट्रीय राजमार्ग 27 की बदहाली पर बोले सामाजिक कार्यकर्ता बी.के. माला — “विकास के दावे सिर्फ पोस्टर तक सीमित हैं, ज़मीनी सच्चाई सड़क की दरारों में दबी है!”
रीवा जिले के मनगवा तहसील अंतर्गत आने वाला गढ़- राष्ट्रीय राजमार्ग 27 आज उस “विकास” की हकीकत बयां कर रहा है, जो कागजों और भाषणों में तो दिखाई देता है, लेकिन ज़मीन पर गड्ढों और धूल की शक्ल में बदल चुका है। यह सड़क, जो कभी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ने वाला प्रमुख मार्ग थी, अब अपनी जर्जर हालत से लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रही है।
कभी यह रास्ता किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा था, लेकिन आज यह सड़क खतरों का गलियारा बन चुकी है। हर दिन इस मार्ग पर दुर्घटनाएं हो रही हैं, कई लोगों की जानें जा चुकी हैं, और दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं। पर शासन और प्रशासन की चुप्पी अब लोगों के सब्र को तोड़ने लगी है।
💬 “गढ़-रोड अब जनता के लिए जख्म बन गई है” — बी.के. माला
रीवा जिले के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता बी.के. माला ने इस गंभीर स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा —
“गढ़- मार्ग की हालत देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि शासन के विकास कार्य केवल दीवारों पर लिखे नारों तक सीमित रह गए हैं। वर्षों से यह सड़क मरम्मत की मांग कर रही है, लेकिन प्रशासन की आंखों के सामने भी यह बदहाली नजर नहीं आती। अधिकारी और जनप्रतिनिधि इसी मार्ग से रोज़ गुजरते हैं, फिर भी न किसी को सड़क की दरारें दिखती हैं, न जनता की तकलीफ।”
उन्होंने बताया कि यह मार्ग गढ़ ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है और मनगवा तहसील को कई गांवों से जोड़ता है। यह सड़क कृषि, शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सभी गतिविधियों की रीढ़ है। लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि बरसात के मौसम में सड़क नाले में तब्दील हो जाती है और गर्मी में धूल से पूरा क्षेत्र धुंधला हो जाता है।
“यह सड़क अब सिर्फ एक रास्ता नहीं रही, यह भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है,” माला ने तीखे शब्दों में कहा।
⚠️ जनता की आवाज़ — “सड़क नहीं, मौत का रास्ता है यह”
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इस सड़क पर कई गंभीर हादसे हुए हैं। ट्रैक्टर, बाइक, ऑटो और एम्बुलेंस तक फंस जाती हैं। मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है, स्कूली बच्चे रोज़ गिरकर घायल हो रहे हैं।
“सड़क की हालत ऐसी है कि चलना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन को कई बार सूचित किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई,” ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।
कृषक वर्ग भी परेशान है। खेतों से फसल लाना-ले जाना मुश्किल हो गया है। व्यापारी अपने माल की ढुलाई को लेकर परेशान हैं। और सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिक झेल रहा है, जिसका रोज़ाना का सफर अब जान जोखिम में डालकर तय होता है।
⚙️ संविदाकार पर सख्त कार्रवाई की मांग
बी.के. माला ने कहा कि इस सड़क के निर्माण कार्य में स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और तकनीकी लापरवाही हुई है।
“यदि संविदाकार की गारंटी अवधि अभी भी चालू है, तो उसे तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए जाएं। अगर समय सीमा समाप्त हो चुकी है, तो नया टेंडर जारी कर पुनः निर्माण करवाया जाए। लेकिन सिर्फ मरम्मत से काम नहीं चलेगा — जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए।”
उन्होंने यह भी कहा कि हर बार सड़क मरम्मत के नाम पर “थोड़ी गिट्टी डाल दी जाती है फिर कुछ ही हफ्तों में उखड़ जाता है।
“यह जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है। सड़कें जनता की संपत्ति हैं, इन्हें ठेकेदारों के लालच की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा,” माला ने कहा।
📣 प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सीधे सवाल
बी.के. माला ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पूछा —
“क्या गढ़- रोड का दर्द आपको नहीं दिखता? क्या जिला प्रशासन और विधायक महोदय इसी रास्ते से नहीं गुजरते? अगर दिखता है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर नहीं दिखता, तो फिर जनता का प्रतिनिधित्व करने का क्या अर्थ?”
उन्होंने कहा कि यह सड़क अब सिर्फ निर्माण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनजीवन और जनसुरक्षा का प्रश्न बन चुकी है। हर एक दिन की देरी एक नई दुर्घटना को न्योता देती है।
🧾 बी.के. माला की प्रमुख मांगें —
1. सड़क की तत्काल मरम्मत और स्थायी निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
2. पूर्व संविदाकार और संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए।
3. लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाए।
4. सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
5. भविष्य में किसी भी सड़क निर्माण के लिए पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाए।
⚖️ “अगर सड़क नहीं सुधरी तो होगा जनआंदोलन”
बी.के. माला ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं की गई, तो वे जनता के साथ मिलकर इस मुद्दे को शासन स्तर तक और सड़कों पर जनआंदोलन के रूप में उठाएंगे।
“जनता की चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। अगर प्रशासन नहीं जागा, तो सड़क की लड़ाई अब सड़कों पर लड़ी जाएगी,” उन्होंने कहा।
📍 गढ़- मार्ग सिर्फ एक सड़क नहीं, यह रीवा जिले के प्रशासनिक दृष्टिकोण की असल तस्वीर है।
रीवा के इस प्रमुख मार्ग की जर्जर हालत ने यह साबित कर दिया है कि जब तक प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक विकास सिर्फ भाषणों तक सीमित रहेगा।

