📰 मऊगंज में नीम-हकीमी का कहर: मेडिकल स्टोर संचालक के गलत उपचार से 5 माह के मासूम की मौत — स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही से ग्रामीणों में आक्रोश
मऊगंज (रीवा)।
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा किए गए कथित "उपचार" से 5 माह के मासूम की मौत हो गई। घटना मऊगंज जिले के खटखरी पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम देवरा की बताई जा रही है, जिसने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
🩺 घटना का पूरा विवरण
जानकारी के अनुसार, ग्राम देवरा निवासी श्वेता यादव अपने 5 माह के मासूम पुत्र धर्मेंद्र यादव (पिता दुर्गेश यादव) की तबीयत खराब होने पर शनिवार दोपहर करीब 12 बजे इलाज के लिए खटखरी निवासी मिश्रीलाल गुप्ता के मेडिकल स्टोर पहुंचीं।
बताया गया कि उस समय मेडिकल स्टोर संचालक स्वयं नहीं था, बल्कि उसका बेटा दुकान पर मौजूद था। उसी ने बच्चे को तीन अलग-अलग सिरप दवाएं पिलाईं। कुछ देर तक बच्चा सामान्य रहा, लेकिन लगभग 15 मिनट बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और वह वहीं दम तोड़ बैठा।
जैसे ही मां ने अपने बच्चे को बेसुध देखा, वह जोर-जोर से चीखने लगी। घटना से घबराए मेडिकल स्टोर संचालक ने महिला से कहा —
“अपने बच्चे को लेकर यहां से चले जाओ, यहां भीड़ मत लगाओ।”
यह बात सुनकर महिला की हालत और खराब हो गई। शोर सुनते ही गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। इसी बीच आशीष सिंह नामक युवक ने तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंची और मेडिकल स्टोर संचालक को अपनी गाड़ी में बैठाकर खटखरी चौकी ले गई।
🚔 पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में
घटना की जानकारी मिलते ही जब स्थानीय मीडिया प्रतिनिधि खटखरी पुलिस चौकी पहुंचे और चौकी प्रभारी अमर सिंह से मामले की जानकारी मांगी, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा—
“हमें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है।”
इस बयान ने पूरे मामले को पुलिस की लापरवाही और संवेदनहीनता की ओर इंगित किया है। सवाल उठता है कि जब पुलिस मौके पर पहुंचकर मेडिकल स्टोर संचालक को लेकर गई, तो फिर चौकी प्रभारी को घटना की जानकारी क्यों नहीं है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के लिए मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है?
⚖️ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले छिंदवाड़ा जिले में गलत दवा देने से दो दर्जन से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं रीवा शहर में हाल ही में एक नामी मेडिकल स्टोर पर नकली और महंगी दवाओं की बिक्री का मामला सामने आया था।
इन घटनाओं के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है —
क्याbरीवा मऊगंज में दवाइयां बेचने वाले संचालक मान्यता प्राप्त फार्मासिस्ट हैं?
क्या दवाइयों का लाइसेंस और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र उनके पास है?
बिना डॉक्टर की पर्ची के बच्चों को सिरप देना कानूनी अपराध नहीं है क्या?
🏥 नीम-हकीमी बनी जानलेवा
रीवा और मऊगंज के आसपास के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे मेडिकल स्टोर हैं जहां बिना किसी चिकित्सा डिग्री या पंजीकरण के लोग दवाइयां बेच रहे हैं और इलाज भी कर रहे हैं।
ऐसे लोग खुद को “कंपाउंडर” या “अनुभवी चिकित्सक” बताकर ग्रामीणों का विश्वास जीतते हैं। लेकिन यह विश्वास अब जानलेवा साबित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन यदि समय रहते इन पर अंकुश नहीं लगाता, तो आगे भी ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।



