📰 राष्ट्रीय राजमार्ग-27 गढ़ की दुर्दशा: छह वर्षों से गड्ढों में तब्दील सड़क, जनता में आक्रोश— कब जागेगा प्रशासन?
कभी आवागमन का प्रमुख मार्ग रहा पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग-27 आज अपनी पहचान खो चुका है। पिछले छह वर्षों से यह सड़क गड्ढों में तब्दील है, जिससे आमजन का जीवन संकट में पड़ गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब यह सड़क नहीं, बल्कि गड्ढों की श्रृंखला बन चुकी है, जहाँ से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है।
🚧 बाईपास बना, पर पुराना मार्ग हुआ उपेक्षित
सन 2019-20 में बाईपास निर्माण के बाद इस पुराने मार्ग की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली। प्रशासन और विभाग दोनों ने मानो इसे भगवान भरोसे छोड़ दिया है। परिणामस्वरूप, ग्राम गढ़, चंदन बाग, थाना परिसर के दक्षिण क्षेत्र में सड़क जगह-जगह टूटी पड़ी है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि बरसात के दिनों में सड़क पर कीचड़ और पानी भर जाता है, जिससे पैदल और दोपहिया वाहनों से चलना बेहद कठिन हो जाता है। कई बार राहगीर और मोटरसाइकिल सवार गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन फिर भी विभागीय अमले के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आदेश में नहीं आया नाम — जनता पूछ रही सवाल
दिनांक 3 फरवरी 2022 को देश के केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट के माध्यम से एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। इस आदेश में मध्यप्रदेश के आठ शहरों, कस्बों और गांवों — मऊगंज, हनुमाना, रघुनाथगंज, रायपुर कर्चुलियान, मनगवां, देवतालाब, गुढ़ और विलायतघाट-चदियां — में निर्मित बायपास के अलावा 83 करोड़ रुपये के कार्यों की स्वीकृति दी गई थी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि गढ़ क्षेत्र का नाम इस सूची में शामिल नहीं था।
ऐसे में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गढ़ को क्यों नजरअंदाज किया गया?
गढ़ क्षेत्र की सड़कों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है — जगह-जगह गड्ढे, टूटी पुलिया, और बरसात के समय कीचड़ से गुजरते लोग। जबकि इसी मार्ग से होकर न सिर्फ स्थानीय यात्री, बल्कि आसपास के ग्रामीण, व्यापारी और छात्र रोजाना आवागमन करते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब अन्य सभी कस्बों और गांवों में बायपास और सड़क विकास के कार्य स्वीकृत हुए, तो गढ़ को इस योजना से बाहर क्यों रखा गया?
क्या यहां के विधायक, सांसद और मंत्री इस गंभीर समस्या से अनजान हैं?
या फिर जनता के मुद्दों को लेकर कभी केंद्र सरकार तक आवाज ही नहीं पहुंचाई गई?
अब तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो गढ़ की सड़कें सुधरीं, न ही इस क्षेत्र के लिए किसी नई स्वीकृति की घोषणा हुई।
लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को गडकरी जी से सवाल करना चाहिए था कि आखिर गढ़ की उपेक्षा क्यों की गई?
🗣️ विधायक ने दिए थे निर्देश, पर काम निकला दिखावा
क्षेत्रीय नागरिकों ने पूर्व में मनगवा विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति से मिलकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विधायक ने तत्काल मौके पर पहुँचकर संबंधित अधिकारियों को सड़क दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। किंतु यह आदेश हवा हवाई में चला गया
जून माह में विभाग द्वारा सड़क मरम्मत का कार्य कराया गया, परंतु यह सुधार मात्र दिखावे का साबित हुआ। सिर्फ एक माह बाद जुलाई में ही सड़क फिर से गड्ढों में तब्दील हो गई। लोगों का कहना है कि घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही के कारण सड़क टिक नहीं पाई।
⚠️ गढ़ क्षेत्र में हादसों का खतरा बढ़ा
गढ़ ग्राम पंचायत और आसपास के क्षेत्र में इस सड़क पर प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली बच्चे, ग्रामीण, व्यापारी और पशुपालक आवागमन करते हैं।
यहाँ पाँच विद्यालय, थाना परिसर, आयुर्वेद औषधालय, पशु औषधालय, सेवा सहकारी समिति और पंचायत भवन स्थित हैं। सड़क की दुर्दशा के कारण लोगों को अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
स्थानीय लोगों का कहना है —
“यह सड़क अब जानलेवा बन चुकी है। आए दिन बच्चे और बाइक सवार गिरते हैं, लेकिन अधिकारी देखने तक नहीं आते। लगता है किसी निजी स्वार्थ के कारण इस सड़क को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है।”
नाली निर्माण न होने से कुछ वर्ष पहले अतिवृष्टि में ढही दीवार, चार मासूमों की हुई थी मौत — कई साल बाद भी नहीं हुआ सुधार
गढ़ क्षेत्र के नईगढ़ी मोड़ के पास कुछ वर्ष हुई दर्दनाक घटना आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। भारी बारिश के दौरान सड़क किनारे पक्की नाली के अभाव में जलभराव हुआ, जिसके चलते पास की दीवार भरभराकर ढह गई थी। इस दर्दनाक हादसे में चार मासूम स्कूली बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
घटना के बाद तत्कालीन विधायक, सांसद, रीवा कलेक्टर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे थे और नाली एवं सड़क निर्माण का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन दुखद तथ्य यह है कि कई वर्ष बीत जाने के बाद भी गढ़ क्षेत्र आज भी पक्की नाली और सड़क निर्माण से वंचित है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर नाली का निर्माण हो जाता, तो शायद वह भीषण हादसा टल सकता था। अब लोगों की माँग है कि प्रशासन जल्द से जल्द स्थायी नाली एवं सड़क निर्माण का कार्य शुरू करे, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी दोबारा न घटे।
😡 जनता में आक्रोश, जिम्मेदारों की चुप्पी
गढ़ और आसपास के लोगों में इस बदहाल सड़क को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।
लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा और शिथिलता का आरोप लगाया है। कई बार शिकायतों के बावजूद न तो विभागीय अधिकारी मौके पर पहुँचे और न ही किसी स्थायी समाधान की पहल हुई।
🙏 जनता की मांग: नालियाँ बनें, सड़क पक्की हो
ग्रामीणों ने रीवा जिला प्रशासन, सांसद एवं मंनगवा विधायक से मांग की है कि
सड़क के दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण किया जाए,
वर्षा जल निकासी की समुचित व्यवस्था हो,
और इस मार्ग को पुनः मजबूती के साथ बनाया जाए, ताकि आवागमन सुचारू रूप से चालू रह सके।
लोगों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के शैक्षणिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक जीवन की धुरी है — इसे दुरुस्त किए बिना विकास की कल्पना संभव नहीं।
🔍 अब देखना होगा...
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि जनता की पुकार कब सुनते हैं।क्या यह सड़क फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट पाएगी या गढ़ और आसपास के लोग यूँ ही गड्ढों में सफर करने को मजबूर रहेंगे?



