खाद्य विभाग की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
“पसंद” और “पॉपुलर ब्रेड” पर क्यों नहीं होती जांच? – एक्सपायरी डेट गायब, फिर भी धड़ल्ले से बिक्री जारी!
रीवा शहर में बीते कुछ दिनों से खाद्य विभाग की टीम द्वारा चलाए जा रहे निरीक्षण अभियान ने होटल और डेयरी व्यवसायों की पोल खोल दी है। शहर के नामी-गिरामी होटल एवं रेस्टोरेंट में की गई छापेमारी के दौरान कई जगहों पर एक्सपायरी पाउडर, पुराने केमिकल और घटिया सामग्री से खाद्य पदार्थ तैयार किए जाने के तथ्य सामने आए हैं।
बीते हफ्ते कोर्ट परिसर के समीप स्थित प्रसादम होटल और प्रसिद्ध बीकानेर होटल में हुई कार्रवाई में जो खुलासे हुए, उन्होंने पूरे शहर को चौंका दिया। इन प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थ बनाने के लिए एक्सपायरी पाउडर और केमिकल्स का उपयोग किया जा रहा था। इतना ही नहीं, पिछले वर्ष सिरमौर चौराहा के पास भी एक डेयरी संचालक को एक्सपायरी दूध पाउडर से दही बनाने के आरोप में पकड़ा गया था।
खाद्य विभाग की इन कार्यवाहियों ने जहां आम उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाई है, वहीं यह भी साफ़ कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा कानूनों का पालन शहर में बेहद ढीला है।
⚠️ एक्सपायरी पाउडर और केमिकल से चल रहा कारोबार
जांच में यह भी स्पष्ट हो गया है कि रीवा जिले में बड़ी संख्या में दुकानदार कम दाम पर एक्सपायरी हो चुके केमिकल और पाउडर खरीदते हैं और उन्हीं से खाद्य सामग्री तैयार कर ग्राहकों को परोसते हैं। इसका मुख्य कारण है सस्ता माल और अधिक मुनाफा। लेकिन इसी मुनाफाखोरी के चक्कर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपायरी सामग्री से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां, फूड प्वाइजनिंग, एलर्जी और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
🍞 बड़ा सवाल – “पसंद” और “पॉपुलर ब्रेड” पर कार्रवाई क्यों नहीं?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब छोटे दुकानदारों और होटल संचालकों पर खाद्य विभाग सक्रिय दिख रहा है, तो फिर “पसंद” और “पॉपुलर ब्रेड” जैसी प्रसिद्ध ब्रेड कंपनियों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
रीवा जिले में खुलेआम बिक रही इन दोनों ब्रांड्स की ब्रेड के ₹10 और ₹20 के पैकेट्स पर एक्सपायरी डेट का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। न उत्पादन तिथि दी गई है, न समाप्ति तिथि। ऐसे में उपभोक्ता यह कैसे तय करें कि ब्रेड ताजा है या कई दिन पुरानी?
ब्रेड आज हर घर का अहम हिस्सा बन चुकी है — सुबह के नाश्ते से लेकर स्कूल के टिफिन और अस्पतालों तक इसका सेवन हो रहा है। कई हॉस्टलों और अस्पतालों में भी यही ब्रेड परोसी जाती है। ऐसे में यदि उत्पाद की एक्सपायरी डेट ही नहीं दी जा रही, तो यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
🏢 फूड इंस्पेक्टर और विभाग की चुप्पी संदिग्ध
स्थानीय नागरिकों ने कई बार खाद्य विभाग कार्यालय पहुंचकर पसंद और पॉपुलर ब्रेड पैकेट्स में एक्सपायरी डेट न होने की शिकायत की, लेकिन अब तक विभाग द्वारा न तो कोई जांच की गई और न ही कंपनियों को कोई निर्देश जारी किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन दोनों कंपनियों के उत्पादन कारखानों की आज तक कभी भी स्वास्थ्य और स्वच्छता मानकों के आधार पर जांच नहीं की गई। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ब्रेड तैयार करने में किन रासायनिक पाउडर्स या प्रिज़र्वेटिव्स का उपयोग हो रहा है और क्या वे मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
📢 जनस्वास्थ्य से बड़ा कोई मुनाफा नहीं
रीवा में यह स्थिति तब है, जब जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं और विभाग के पास पर्याप्त संसाधन भी हैं। फिर भी यदि ब्रेड जैसी सामान्य उपभोक्ता वस्तु पर कोई जांच नहीं हो रही, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर रहा है?
जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर क्यों इन नामी ब्रांड्स को विशेष छूट मिली हुई है। क्या विभागीय मिलीभगत के चलते ही इन पर कार्रवाई नहीं हो रही?
📋 जनहित में जरूरी कदम
1. खाद्य विभाग को तुरंत पसंद और पॉपुलर ब्रेड के निर्माण इकाइयों का निरीक्षण करना चाहिए।
2. सभी ब्रेड पैकेट्स पर निर्माण तिथि (Manufacturing Date) और समाप्ति तिथि (Expiry Date) अनिवार्य की जाए।
3. मानक से बाहर रसायन या एक्सपायरी पाउडर मिलने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
4. उपभोक्ताओं को भी चाहिए कि वे उत्पाद खरीदने से पहले लेबल अवश्य जांचें और संदेहास्पद वस्तु की शिकायत करें।
कार्रवाई की निरंतरता और जवाबदेही जरूरी
खाद्य विभाग की हालिया कार्यवाहियां स्वागतयोग्य हैं, लेकिन सिर्फ कुछ होटलों पर छापेमारी से समस्या का समाधान नहीं होगा।
जब तक शहर की हर खाद्य इकाई — बड़ी हो या छोटी — समान रूप से जांच के दायरे में नहीं आती, तब तक उपभोक्ता सुरक्षित नहीं हैं।


