तहसील मनगवा बनी भ्रष्टाचार का अड्डा, अधिकारी बने मूकदर्शक — पूर्व अधिवक्ता संघ अध्यक्ष प्रभात चंद्र दुबेदी की प्रतिक्रिया
मनगवा तहसील में फैलते भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को लेकर अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रभात चंद्र दुबेदी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तहसील मनगवा आज “लूट का अड्डा” बन चुकी है। यहाँ भ्रष्टाचार, फाइल गुमशुदगी, नकल के नाम पर वसूली और कर्मचारियों की मनमानी आम बात हो गई है।
दुबेदी ने बताया कि तहसीलदार आंचल के कार्यकाल में तहसील के कर्मचारी और पटवारी पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं। जनता की सुनवाई नहीं हो रही, अधिवक्ताओं की बात को नजरअंदाज किया जा रहा है और हर छोटे काम के लिए लोगों को परेशान किया जा रहा है।
फाइल गुम, नकल शुल्क में मनमानी
दुबेदी के अनुसार तहसील मनगवा में फाइलों का रखरखाव पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। लोक सेवा केंद्र “गंगेव” के नाम से संचालित होने के बावजूद यहाँ नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया भ्रष्टाचार से ग्रस्त है।
नकल के नाम पर एक पन्ने के लिए 20 रुपये स्टेशनरी शुल्क और 20 रुपये टिकट के नाम पर वसूले जा रहे हैं। कई बार अधिवक्ता या पक्षकारों से अतिरिक्त धनराशि लिए बिना फाइल की प्रतिलिपि नहीं दी जाती।
दुबेदी ने कहा कि जिन फाइलों का रिकॉर्ड तहसील में उपलब्ध नहीं होता, उन पर सीधा लिख दिया जाता है — “प्रभार में प्राप्त नहीं है।” हैरानी की बात यह है कि SDO कोर्ट की फाइलें, फैसले और अपील संबंधी दस्तावेज भी गायब हैं। इन सबकी शिकायत लिखित रूप से उपखंड अधिकारी को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिवक्ताओं के मामलों में भेदभाव
दुबेदी ने बताया कि तहसील कार्यालय में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। “यदि कोई फाइल पटवारी या कर्मचारी के माध्यम से आती है तो तुरंत आदेश जारी कर दिया जाता है, लेकिन अधिवक्ता द्वारा लाई गई फाइलें महीनों तक बिना आदेश के पड़ी रहती हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने खुलासा किया कि उनके पास कम से कम 20 ऐसे प्रकरण हैं जिनकी इत्तलाबी (सूचना) अब तक जारी नहीं हुई।
पटवारियों की मनमानी और धमकी का खेल
दुबेदी ने कहा कि हल्का पटवारी गढ़ और कांटी क्षेत्र में पूर्व में पदस्थ संजय कोल और सौरभ ठाकुरिया जैसे कर्मचारी पक्षकारों से मनमाना व्यवहार करते हैं। ये लोग फर्जी मुकदमे दर्ज कराने की धमकी देकर किसानों और ग्रामीणों को डराते हैं।
“वे खुलेआम कहते हैं कि अधिवक्ता से क्यों काम करवा रहे हो, सीधे हमारे माध्यम से कराओ। ऐसा न करने पर फर्जी मुकदमे की धमकी देते हैं,” दुबेदी ने बताया। यह स्थिति तहसील मनगवा में अन्याय और भय का माहौल पैदा कर रही है।
CCTV कैमरे पर उठे सवाल
तहसील परिसर में लगे CCTV कैमरों को लेकर भी दुबेदी ने गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि तहसीलदार ने कैमरे अपने निजी मोबाइल से कनेक्ट करा रखे हैं, जिससे आम जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा। जब इस संबंध में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो तहसीलदार का जवाब था कि कैमरे निजी खर्च से लगाए गए हैं। दुबेदी ने कहा कि “यदि कैमरे निजी खर्च से लगाए गए हैं, तो यह स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इन्हें आम जनता के हित में खुला किया जाना चाहिए ताकि लोग अपने प्रकरणों की स्थिति स्वयं देख सकें।”
उच्च प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
दुबेदी ने कहा कि तहसील मनगवा में जारी यह भ्रष्टाचार और अन्याय अब असहनीय हो चुका है। तहसीलदार के संरक्षण में कर्मचारियों द्वारा खुलेआम लूट और शोषण किया जा रहा है, लेकिन उपखंड अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मनगवा तहसील की तत्काल जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
दुबेदी ने कहा कि “मेरा सरकार और प्रशासन से यही अनुरोध है कि किसानों और आम जनता के साथ हो रहे इस शोषण को तुरंत रोका जाए और तहसील मनगवा को एक आदर्श तहसील के रूप में विकसित किया जाए।”

