“नरवाई प्रबंधन एवं प्राकृतिक खेती – मृदा स्वास्थ्य का आधार”
ग्राम पंचायत देवास, विकासखंड गंगेव में “नरवाई प्रबंधन एवं प्राकृतिक खेती कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत के सरपंच रमेश साकेत ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में जनपद सदस्य अखिलेश पटेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील कृषक, कृषि विस्तार अधिकारी युगल किशोर प्रधान, राज कुमार शर्मा, तथा बी.टी.एम. (आत्मा परियोजना) दीपक कुमार श्रीवास्तव सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम स्तरीय “धरती माता बचाओ निगरानी समिति” के गठन एवं उसके उद्देश्य पर चर्चा के साथ हुआ। इस अवसर पर राज कुमार शर्मा ने नरवाई प्रबंधन के लाभों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि—
नरवाई मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता और जल धारण क्षमता को मजबूत बनाती है।
खेत की सतह पर नरवाई की परत नमी को बनाए रखती है, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।
नरवाई खरपतवारों की वृद्धि को रोकती है और खेत को प्राकृतिक आवरण प्रदान करती है।
जीरो जुताई या हल्की जुताई अपनाने से समय व लागत दोनों की बचत होती है।
नरवाई से भूसा तैयार कर पशु आहार या अन्य उपयोग में लिया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि नरवाई को जलाने से अनेक हानियां होती हैं — इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीव एवं केंचुए नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता घटती है और खेत कठोर हो जाते हैं। परिणामस्वरूप अगली फसल की उत्पादकता में गिरावट आती है। इस विषय पर पर्यावरणीय नुकसान, दंड एवं जुर्माने की जानकारी भी किसानों को दी गई।
कार्यक्रम के अगले चरण में युगल किशोर प्रधान द्वारा किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा रबी फसलों की बुवाई से पूर्व मिट्टी परीक्षण के लाभों पर चर्चा की।
दीपक कुमार श्रीवास्तव ने रबी फसलों में बीज भंडारण एवं प्रबंधन, संतुलित एवं प्राकृतिक खाद के उपयोग विशेष रूप से जीवामृत के प्रयोग की जानकारी दी। साथ ही कोदो फसल के पंजीयन एवं समर्थन मूल्य की प्रक्रिया समझाई।
उन्होंने बताया कि नरवाई प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्र जैसे — हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रोटावेटर और स्ट्रॉ रीपर का उपयोग किया जा सकता है। ये मशीनें खेत को बिना पूरी जुताई किए सीधे बीज बोने में सक्षम हैं, जिससे नरवाई खेत में ही मिलकर जैविक खाद के रूप में परिवर्तित हो जाती है। रोटावेटर नरवाई को बारीक कर मिट्टी में मिला देता है, वहीं स्ट्रॉ रीपर से भूसा बनाकर उसे पशु चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
अंत में किसानों को यह जानकारी दी गई कि कृषि अभियांत्रिकी विभाग, रीवा के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन कर सुपर सीडर जैसी मशीनों को निर्धारित अनुदान पर खरीदा जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन आत्मा परियोजना के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया तथा अंत में सरपंच रमेश साकेत ने सभी कृषकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

