Breaking News // सरकारी लापरवाही का शर्मनाक मामला: सीधी में जिंदा महिला को रिकॉर्ड में “मृत” घोषित किया गया!
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश — अब रुकमन खुद के “जिंदा” होने के सबूत जुटा रही है
मध्यप्रदेश के सीधी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। कुसमी जनपद क्षेत्र के गोतरा गांव की आदिवासी महिला रुकमन को सरकारी रिकॉर्ड में “मृत” घोषित कर दिया गया है, जबकि वह पूरी तरह जिंदा है। बीते एक वर्ष से अधिक समय से रुकमन अपनी ‘जिंदगी का सबूत’ लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिला।
रुकमन का दर्द भरा बयान पूरे तंत्र की पोल खोल देता है। वह कहती है —
“साहब, मैं जिंदा हूं… लेकिन पंचायत वाले कहते हैं कि तुम तो मर चुकी हो! अब बताओ, मैं अपने जीने का सबूत कहां से लाऊं?”
इस एक पंक्ति में उस महिला की बेबसी, सरकारी लापरवाही और व्यवस्था की असंवेदनशीलता साफ झलकती है।
कैसे हुआ मामला दर्ज?
सूत्रों के मुताबिक, पंचायत कर्मियों ने समग्र पोर्टल पर लापरवाही से रुकमन के नाम पर ‘मृत्यु प्रविष्टि’ कर दी। परिणामस्वरूप उसका नाम राशन सूची, पेंशन योजना और अन्य सभी सरकारी लाभों से हटा दिया गया।
अब न उसे राशन मिल रहा है, न किसी सरकारी योजना का लाभ — क्योंकि सरकारी दस्तावेज़ों में वह अब “स्वर्गवासी” बताई जा रही है।
परिवार के सदस्य और ग्रामीण हैरान हैं कि एक जीवित व्यक्ति को “मरा हुआ” घोषित कर देना आखिर कैसे संभव है? यह सिर्फ एक प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों पर गहरी चोट है।
रुकमन की गुहार और कलेक्टर की कार्रवाई
थक-हारकर रुकमन ने हाल ही में सीधी कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान अपनी पीड़ा सुनाई। उसने बताया कि एक छोटी सी गलती ने उसका जीवन बर्बाद कर दिया है और अब वह खुद के “जिंदा होने” का प्रमाण देने में ही जुटी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि —
“यह अत्यंत गंभीर मामला है। दोषी पाए जाने वाले पंचायत कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और रुकमन का नाम समग्र आईडी पोर्टल पर पुनः सक्रिय किया जाएगा।”
एक बड़ी विडंबना
यह प्रकरण केवल एक महिला की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
जहां एक क्लिक की गलती किसी नागरिक को ‘मृत’ घोषित कर सकती है और उसके सारे अधिकार खत्म कर सकती है।
अब सवाल यह है —
क्या रुकमन को वाकई उसकी पहचान और न्याय वापस मिलेगा?या फिर वह सरकारी फाइलों में हमेशा के लिए एक “जिंदा भूत” बनकर रह जाएगी?

