धारा 89 की सुनवाई में भ्रष्टाचार के आरोप — सीईओ जिला पंचायत पर फिर उठे सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी बोले — “सुनवाई के नाम पर चल रही है हीलाहवाली, सीईओ से हटाई जाएं न्यायिक शक्तियां”
रीवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों में है।
सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने पंचायत अधिनियम की धारा 89, 40 और 92 के मामलों में लापरवाही, पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
द्विवेदी का कहना है कि जिला पंचायत कार्यालय में महीनों से लंबित प्रकरणों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, जबकि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रमाण मौजूद हैं।
⚖️ कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के अनुसार—
धारा 89 – ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार या अनियमितता की जांच और सुनवाई का प्रावधान।
धारा 40 – दोषी पाए गए सरपंच, सचिव या पंचायत कर्मियों को पद से हटाने का अधिकार।
धारा 92 – भ्रष्टाचार से जुड़ी राशि की वसूली (रिकवरी) का प्रावधान।
पूर्व अतिरिक्त प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया ने इन धाराओं की सुनवाई के लिए 90 दिन की समयसीमा तय की थी। परंतु वर्तमान में इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे पूरे पंचायत प्रशासन की पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।
🏢 सीईओ की कार्यशैली पर गंभीर आरोप
शिवानंद द्विवेदी ने आरोप लगाया कि सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर पंचायतों के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में जानबूझकर “डेट पर डेट” दे रहे हैं।
> “हर मंगलवार को सुनवाई तय होती है, लेकिन कई बार सीईओ स्वयं उपस्थित नहीं रहते। जाँच में दोषी पाए गए मामलों में भी कोई आदेश पारित नहीं किया जाता, बल्कि दूसरे पक्ष से समझौता कर सुनवाई को आगे बढ़ा दिया जाता है।”
— शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता
द्विवेदी के अनुसार, रीवा जिला पंचायत में पदभार संभालने के बाद से अब तक एक भी धारा 89, 40 या 92 के तहत अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है। यह प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
📄 14 अक्टूबर को फिर जारी हुई सुनवाई नोटिस – पारदर्शिता पर संदेह बरकरार
सीईओ जिला पंचायत कार्यालय से हाल ही में 14 अक्टूबर (मंगलवार) को धारा 89 की नई सुनवाई नोटिस जारी की गई है।
इसमें 18 ग्राम पंचायतों में हुई अनियमितताओं पर सुनवाई प्रस्तावित है, परंतु कार्यकर्ता द्विवेदी का कहना है—
> “हर बार की तरह इस बार भी सुनवाई आगे बढ़ जाएगी या बिना परिणाम के समाप्त हो जाएगी। जब तक जिला प्रशासन के शीर्ष स्तर से हस्तक्षेप नहीं होगा, न्याय संभव नहीं है।”
📍 कौन-कौन सी पंचायतें हैं जांच के दायरे में
जिन पंचायतों में करोड़ों रुपये की रिकवरी और भ्रष्टाचार की जांच प्रस्तावित है, उनमें शामिल हैं—
जनपद सिरमौर: सदहना, डिहिया
रायपुर करचुलियान: मनकहरी, बुढ़िया, पुरवा, इटारपहाड़
हनुमना: बराव
नईगढ़ी: जोरौट, शिवराजपुर, बंधवा कोठार
जवा: अकौरी, हर्दोली
रीवा: कचूर
गंगेव: कैथा, सेदहा, पिपरहा, बाबूपुर, लौरी
इन ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य, सामग्री आपूर्ति और विकास योजनाओं में अनियमितता के आरोप हैं, जिनसे जुड़ी राशि करोड़ों में बताई जा रही है।
🧾 धारा 40 और 92 में समयबद्ध कार्यवाही का स्पष्ट निर्देश
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशानुसार धारा 40 और 92 के अंतर्गत कार्यवाही 90 दिनों में पूर्ण की जानी चाहिए।
लेकिन वर्तमान में न तो समयसीमा का पालन हो रहा है, न ही दोषियों पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई।
इस कारण न केवल पंचायत व्यवस्था की साख पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है।
📢 “सीईओ से हटाई जाएं न्यायिक शक्तियां” – शिवानंद द्विवेदी की मांग
शिवानंद द्विवेदी ने शासन से मांग की है कि सीईओ जिला पंचायत को दी गई धारा 89, 40 और 92 की अर्ध-न्यायिक शक्तियां कलेक्टर को सौंपी जाएं।
उनका कहना है कि—
> “सीईओ पंचायत विभाग का ही अधिकारी है, और वही अपने विभाग के सचिव, रोजगार सहायक या इंजीनियरों की जांच करता है। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद ही नहीं की जा सकती। यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।”
पंचायतों में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की गहरी जड़ें
रीवा और मऊगंज जिले की पंचायतों में लंबे समय से धारा 89, 40 और 92 के प्रकरण लंबित हैं।
सुनवाई में देरी, आदेशों की अनुपस्थिति और भ्रष्टाचार के आरोप यह दर्शाते हैं कि स्थानीय स्तर पर पंचायती राज अधिनियम का उद्देश्य ही कमजोर पड़ गया है।
यदि शासन स्तर पर इस पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो यह मुद्दा राज्यव्यापी प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा प्रश्न बन सकता है।




