📰 रीवा में स्वास्थ्य विभाग पर गहराया भ्रष्टाचार का साया — विधायक नागेंद्र सिंह की चिट्ठी से मचा हड़कंप, CMHO पर गंभीर आरोप
रीवा जिले में स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। आए दिन सामने आने वाली अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की खबरों के बीच अब एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजीव शुक्ला पर भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब गुढ़ क्षेत्र के वरिष्ठ विधायक नागेंद्र सिंह ने स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
📜 विधायक की चिट्ठी बनी सुर्खियों का केंद्र
28 अक्टूबर 2025 को दिनांकित यह पत्र विधायक नागेंद्र सिंह की ओर से मुख्यमंत्री को भेजा गया, जिसकी प्रति अब सार्वजनिक हो चुकी है।
पत्र में विधायक ने लिखा है कि —
“रीवा जिले के पदस्थ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला द्वारा की जा रही व्यापक अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाने की आवश्यकता है। जनप्रतिनिधि और समाजसेवी श्री रामकांत त्रिपाठी द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में कई गंभीर तथ्य उजागर हुए हैं, जिनमें पंजीयन, आउटसोर्सिंग भर्ती, मनमाना अटैचमेंट, दवा एवं उपकरण खरीदी में गड़बड़ी, सीआरएम भ्रमण के नाम पर फंड की बंदरबांट और भंडार क्रय नियमों के उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं।”
पत्र में विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि डॉ. शुक्ला के कार्यकाल में चल रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
⚖️ मुख्य आरोप जिन पर उठे सवाल
विधायक नागेंद्र सिंह ने अपने पत्र में निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान आकर्षित कराया है —
1️⃣ अवैध पंजीयन:
क्लीनिकों और नर्सिंग होम को नियमों की अनदेखी कर पंजीकरण देना।
2️⃣ आउटसोर्सिंग भर्ती घोटाला:
नियुक्तियों में मनमानी और पात्र अभ्यर्थियों की उपेक्षा।
3️⃣ मनचाहा अटैचमेंट:
चिकित्सीय स्टाफ का नियम विरुद्ध स्थानांतरण और संलग्नीकरण, जिससे अस्पतालों की सेवाएँ ठप।
4️⃣ खरीदी में गड़बड़ी:
दवाओं और उपकरणों की खरीद में भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान।
5️⃣ फंड की बंदरबांट:
सीआरएम भ्रमण और अन्य मदों में मिले फंड का गलत उपयोग।
🗣️ विधायक की मांग — “EOW या लोकायुक्त से जांच कराई जाए”
विधायक नागेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में यह भी स्पष्ट कहा कि यह मामला जनहित और गंभीर कदाचार से जुड़ा है। इसलिए इसकी जांच EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) या लोकायुक्त जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण जांच न हो।
उन्होंने आगे यह भी लिखा कि —
“CMHO डॉ. संजीव शुक्ला को जांच पूरी होने तक पद से हटाया जाए और उनके कार्यकाल में हुई गड़बड़ियों में शामिल अधिकारियों के विरुद्ध FIR दर्ज की जाए।”
🩺 विभाग की साख पर उठे सवाल
रीवा जिले में स्वास्थ्य विभाग की साख पहले भी कई बार विवादों में रही है। फर्जी पंजीयन, दवाओं की कमी और ठेकेदारी भ्रष्टाचार के मामलों ने विभाग की छवि को पहले ही धूमिल कर दिया था। अब विधायक की यह चिट्ठी न केवल स्वास्थ्य विभाग के भीतर की गड़बड़ियों को उजागर कर रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि सत्ताधारी दल के विधायक भी अब चुप नहीं बैठना चाहते।
🧾 जनता और सामाजिक संगठनों की मांग — “निष्पक्ष कार्रवाई हो”
रीवा के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण पर कहा कि “यह मामला केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के भ्रष्टाचार का प्रतीक है।”
जनता अब मुख्यमंत्री से अपेक्षा कर रही है कि वे इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई करें ताकि भविष्य में ऐसे घोटाले दोबारा न हों।
रीवा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। अब विधायक नागेंद्र सिंह की इस चिट्ठी ने भ्रष्टाचार के उस जाल को उजागर किया है जिसे लंबे समय से दबाने की कोशिश की जा रही थी।
अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर हैं — क्या वे इस मामले में कठोर कार्रवाई करेंगे, या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?

