हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस के बाद मऊगंज कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई — नईगढ़ी की जिलहंडी पंचायत में भ्रष्टाचार पर 68 लाख से अधिक की वसूली के आदेश
रीवा जिले के मऊगंज अंतर्गत जनपद पंचायत नईगढ़ी की जिलहंडी ग्राम पंचायत में हुए 68 लाख 43 हजार 836 रुपए के व्यापक भ्रष्टाचार के मामले में आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा जारी अवमानना नोटिस के बाद कलेक्टर मऊगंज संजय कुमार जैन ने 06 दोषियों के विरुद्ध वसूली एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
यह कार्रवाई रिट याचिका क्रमांक WP/5957/2025 एवं अवमानना याचिका क्रमांक CONC/5946/2025 के बाद हुई, जिसे याचिकाकर्ता सुधाकर सिंह, बंसपति द्विवेदी और आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने संयुक्त रूप से दायर किया था। इस पूरे मामले की पैरवी अधिवक्ता स्वप्निल सोहगौरा ने की थी।
🔎 भ्रष्टाचार की कहानी – 28 कार्यों में गड़बड़ी उजागर
जिलहंडी पंचायत में पीसीसी सड़क, पुलिया, खेत तालाब, आंगनवाड़ी भवन, ग्रेवल सड़क और शौचालय निर्माण सहित 28 से अधिक कार्यों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। वर्ष 2021 से 2025 तक ग्रामवासी सुधाकर सिंह, बंसपति द्विवेदी, देवेंद्र सिंह, जगदीश सिंह व अन्य ग्रामीणों ने आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के साथ मिलकर शिकायतें दर्ज कराईं।
🧾 दो जांचों में सिद्ध हुआ 68 लाख 43 हजार 836 रुपए का भ्रष्टाचार
प्रारंभिक जांच आरईएस एसडीओ एसआर प्रजापति द्वारा की गई, जिसमें 68,43,836 रुपए की वसूली निर्धारित की गई। बाद में आरोपी पक्ष ने जांच पर आपत्ति उठाते हुए पुनः जांच की मांग की। इसी क्रम में जनपद पंचायत नईगढ़ी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से निलंबित ईई टी.पी. गुर्दवान की अगुवाई में एक फर्जी 09 सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई।
इस टीम ने बिना किसी औपचारिक आदेश के फर्जी रिपोर्ट तैयार कर वसूली राशि को घटाकर मात्र 56,305 रुपए कर दिया, जिसे तत्कालीन अधिकारियों ने स्वीकृत भी कर लिया।
⚖️ चौथी जांच में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा
बाद में तत्कालीन सीईओ जिला पंचायत सौरभ सोनवणे के निर्देश पर चौथी जांच ईई एस.बी. रावत, मनरेगा परियोजना अधिकारी शिव सोनी और डीएमएफ अधिकारी संजय सिंह की टीम ने की। रावत की रिपोर्ट में एसआर प्रजापति की प्रारंभिक जांच को सही ठहराया गया और वसूली राशि 68 लाख 43 हजार 836 रुपए यथावत रखी गई।
⚖️ हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला – अवमानना याचिका के बाद कलेक्टर की नींद टूटी
लगातार कार्रवाई न होने पर याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट जबलपुर की शरण ली। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी ने आदेश दिया कि 90 दिनों में सुनवाई पूरी कर आदेश पारित किया जाए।
परंतु समयसीमा बीत जाने के बाद भी आदेश जारी न होने पर अवमानना याचिका (CONC/5946/2025) दायर की गई।
अवमानना नोटिस जारी होते ही कलेक्टर कार्यालय मऊगंज में खलबली मच गई और आखिरकार 22 अक्टूबर 2025 को 22 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी कर दिया गया।
💼 छह दोषियों पर हुई कार्रवाई
कलेक्टर मऊगंज के आदेशानुसार निम्नलिखित 06 दोषियों के विरुद्ध वसूली की गई —
क्रमांक दोषी अधिकारी/पद वसूली राशि (₹)
1 पूनम सिंह (पूर्व सरपंच) 22,57,483
2 सत्येंद्र वर्मा (पूर्व सचिव) 14,59,378
3 नवल किशोर जायसवाल (पूर्व सचिव) 7,98,112
4 प्रवीण पांडे (उपयंत्री) 14,92,120
5 जगदीश राजपूत (सहायक यंत्री) 8,08,337
6 सुशीला साहू (पूर्व सरपंच) 28,416
कुल वसूली राशि ₹68,43,836
सीईओ जिला पंचायत रीवा को आदेशित किया गया है कि उक्त राशि की वसूली सुनिश्चित करें एवं दोषियों पर अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्यवाही करें।
❓ फर्जी जांच टीम पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
हालांकि 68 लाख की वसूली के आदेश तो जारी हो गए हैं, लेकिन जानकारों ने सवाल उठाया है कि फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार करने वाले निलंबित ईई टी.पी. गुर्दवान और उनकी नौ सदस्यीय टीम पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार ऐसी कोई टीम अधिकृत रूप से गठित ही नहीं की गई थी।
⚠️ एफआईआर पर भी उठ रहे सवाल
भ्रष्टाचार के इतने बड़े मामले में एफआईआर दर्ज न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब कलेक्टर मऊगंज द्वारा धारा 89 और 92 के तहत आदेश पारित कर दोष सिद्ध कर दिए गए हैं, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई भी होनी चाहिए।
📍अब अगला कदम सीईओ जिला पंचायत के पाले में
अब देखना यह है कि क्या सीईओ जिला पंचायत रीवा दोषियों से 68 लाख 43 हजार 836 रुपए की वसूली कर पाएंगे या मामला फिर से प्रशासनिक फाइलों में दब जाएगा।







