ब्रेकिंग न्यूज़ — रीवा-मऊगंज में सवारियों की जान पर खेल रहा परिवहन तंत्र!
फिटनेस, बीमा बगैर दौड़ रहे ओवरलोड ऑटो और स्कूली वाहन — शिक्षा व परिवहन विभाग कुंभकर्ण की नींद में
रीवा और मऊगंज जिलों में सड़क सुरक्षा के नियम अब मज़ाक बन चुके हैं। गांव से लेकर शहर तक सड़कों पर दौड़ रहे हैं ऐसे ऑटो टैक्सी और स्कूली वाहन, जो न केवल ओवरलोड सवारियां ढो रहे हैं बल्कि फिटनेस, बीमा और लाइसेंस जैसी बुनियादी शर्तों को भी पूरी तरह अनदेखा कर रहे हैं।
जहां एक ओर प्रशासन बच्चों की सुरक्षा और सड़क अनुशासन के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग दोनों ही कुंभकर्ण की नींद सोए हुए हैं।
🚨 स्कूल वैन और ऑटो बने खतरे का पहिया
स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहन अब नियमों का पालन नहीं बल्कि उनका उल्लंघन कर रहे हैं। एक छोटे से ऑटो में 15 से 20 बच्चों को बैठाकर चालक लापरवाही से सड़कों पर दौड़ाते हैं। कई वाहन बिना परमिट, बिना बीमा और बिना फिटनेस के ही स्कूलों के गेट तक पहुंच जाते हैं।
अभिभावकों का कहना है कि “हर दिन बच्चों को स्कूल भेजते वक्त डर लगता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए।” बावजूद इसके विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
⚠️ ओवरलोड ऑटो टैक्सियों पर कोई नियंत्रण नहीं
रीवा,मनगवा गंगेव, गढ़,कटरा, चाकघाट, सिरमौर लालगांव जवा, सोहागी, मऊगंज, देवतालाब, सिरमौर, हनुमना नईगढ़ी, क्षेत्र की सड़कों पर ऑटो टैक्सियों में सवारियों को इस कदर ठूंस-ठूंसकर भरा जा रहा है कि चलती गाड़ी में यात्रियों की जान किसी भी समय जा सकती है।
एक ऑटो में 3 सवारियों की अनुमति होती है, लेकिन यहां 20 से 25 लोगों को बिठा लिया जाता है। कई बार तो चालक बिना लाइसेंस के भी वाहन चलाते हैं।
तीन पहिया वाहन में केवल तीन सवारी को ही बैठाया जा सकता हैं। लेकिन रीवा मऊगंज जिले में वर्तमान समय पर शहर से लेकर गांव तक तीन पहिया वाहनों की संख्या वर्तमान समय में लगभग 5000 बताई जा रही है किंतु यह वहां के व्यवस्थित संचालन की कोई व्यवस्था न होने के कारण मनमानी सवारियां भरी जा रही है यह इसी ओर इशारा करता है अब प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है जब कभी कोई बड़ी दुर्घटना घटती है तभी प्रशासन सक्रिय होता है इसके बाद उन्हें सहमत प्रदान कर दिया जाता है। साथ ही वाहनों के स्वरूप भी बदले जा रहे हैं जबकि जानकारों का कहना है कि बिना परिवहन विभाग की अनुमति के बहनों का स्वरूप नहीं बदला जा सकता।
🏢 विभागों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परिवहन और शिक्षा विभाग दोनों की मिलीभगत और लापरवाही के कारण ही यह खतरनाक प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
परिवहन अधिकारी केवल औपचारिक जांच कर अपनी रिपोर्ट दे देते हैं, जबकि जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा भी स्कूली वाहनों की नियमित जांच नहीं की जाती।
💔 अवसर रहते नहीं जागे अधिकारी, तो हो सकते हैं बड़े हादसे
यह हालात चेतावनी हैं — यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी बड़ा हादसा घट सकता है। किसी मां का बेटा, किसी पत्नी का पति या किसी बच्चे का पिता सड़क पर लापरवाही का शिकार हो सकता है।





