बालक हायर सेकेंडरी स्कूल गढ़ में पेवर ब्लॉक निर्माण पर सवाल गुणवत्ता पर उठे गंभीर आरोप, प्राक्कलन से उलट हो रहा काम; जांच की मांग तेज
जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत स्थित बालक हायर सेकेंडरी स्कूल गढ़ परिसर में इन दिनों चल रहे पेवर ब्लॉक निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। निर्माण की गुणवत्ता, कार्य प्रक्रिया और प्राक्कलन से जुड़ी कई खामियों ने न केवल अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि शासन द्वारा जारी निर्देशों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में स्वीकृत राशि का लगभग आधा हिस्सा ही वास्तविक तौर पर उपयोग किया जा रहा है, जबकि शेष धनराशि “विभिन्न स्तरों पर बांटने” की चर्चा क्षेत्र में आम है।
प्राक्कलन से अलग हो रहा निर्माण, बेसवर्क अधूरा
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सरकारी संस्थान में पेवर ब्लॉक बिछाने से पहले निम्न तीन चरण अनिवार्य होते हैं—
1. मजबूत मुरम की परत
2. गिट्टी व रेत का संतुलित मिश्रण
3. कम्पैक्शन व लेवलिंग
इनमें कमी आने पर पेवर ब्लॉक कुछ ही महीनों में उखड़ने लगता है, धंसने लगता है या किनारों से टूटने लगता है।
लेकिन स्कूल परिसर में निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट दिखाई दिया कि—
बेस की मोटाई आवश्यक मानकों से कम है,
केम्पैक्शन अधूरा है,
कई जगहों पर पेवर ब्लॉक सीधे मुरम पर बिछा दिए गए हैं।
यही कारण है कि रीवा जिले व मऊगंज क्षेत्र के कई सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में पिछले वर्षों में बिछाए गए पेवर ब्लॉक कुछ ही महीनों में उखड़ने लगे, जिसकी शिकायतें जनपद स्तर पर दर्ज भी हुईं।
लाखों का काम, फिर भी कोई विवरण बोर्ड नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्थल पर—
कार्य की कुल लागत,
परियोजना की स्वीकृति तिथि,
प्रारंभ और समाप्ति तिथि,
ठेकेदार/एजेंसी का नाम,
तकनीकी स्वीकृति अधिकारी,
प्राक्कलन की प्रतिलिपि
इनमें से किसी भी जानकारी वाला अनिवार्य डिस्प्ले बोर्ड नहीं लगाया गया है। सरकारी नियमों के अनुसार हर विकास कार्य में यह बोर्ड लगाना आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इनका न होना अपने आप में संदेह पैदा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि—
“जब शुरुआत ही छिपाकर की जाए, तो गुणवत्ता की गारंटी कैसे दी जा सकती है?”
विभाग का पक्ष गायब, अधिकारी चुप्पी साधे बैठे
इस संबंध में संबंधित विभाग के कई अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन किसी ने भी आधिकारिक तौर पर अपना पक्ष रखने से इंकार कर दिया।
केवल सूत्रों ने बताया कि—
बजट जारी हो चुका है
कार्य एजेंसी को सौंपा गया है
और पेवर ब्लॉक बिछाने का उद्देश्य स्कूल परिसर को स्वच्छ व व्यवस्थित बनाना है
लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों का जवाब कोई देने को तैयार नहीं।
“भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है”—स्थानीय नागरिकों की पीड़ा
क्षेत्रवासियों में नाराजगी इस कदर है कि कई लोग खुले शब्दों में कह रहे हैं—
“अब भ्रष्टाचार को रोकने की बात करना गलत लगता है। भ्रष्टाचारियों को ही सम्मान मिलता है और ईमानदारी मज़ाक बनकर रह गई है।”
जनता का मानना है कि यदि बालक हायर सेकेंडरी स्कूल गढ़ के कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी व वित्तीय जांच हो जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
पेवर ब्लॉक योजना—सुविधा का माध्यम या कमाई का जरिया?
पेवर ब्लॉक लगाने का मूल उद्देश्य सरकारी परिसरों को—
साफ-सुथरा,
धूल रहित,
आवागमन योग्य
बनाना होता है।
लेकिन रीवा संभाग में पिछले कुछ वर्षों में यह योजना कथित भ्रष्टाचार का आसान माध्यम बन गई है।
कई संस्थानों में पेवर ब्लॉक गायब होने लगे,
कई जगह टूट गए,
कई स्थानों पर ब्लॉक धंस गए,
जबकि सभी कार्यों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए।
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
जनता की शिकायतों, निर्माण में हो रही अनियमितताओं और विभागीय चुप्पी को देखते हुए आवश्यक है कि—
तकनीकी निरीक्षण,
वित्तीय ऑडिट,
साइट वेरिफिकेशन,
सैंपल टेस्टिंग,
बेसवर्क जाँच

