मध्यप्रदेश में ‘कागज़ पर पोषण’ — राहुल गांधी के ट्वीट से फिर गर्माई बहस, विंध्य वसुंधरा की रिपोर्टों पर मुहर!
रीवा–मऊगंज सहित प्रदेशभर में पोषण आहार योजना में भारी गड़बड़ियों का खुलासा — विंध्य वसुंधरा समाचार पहले से करता रहा है आगाह, अब राहुल गांधी ने वीडियो साझा कर सरकार पर बोला हमला
मध्यप्रदेश की महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित पोषण आहार और साझा चूल्हा योजनाओं में चल रही लापरवाही और भ्रष्टाचार पर विंध्य वसुंधरा समाचार द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंज उठे हैं।
कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को एक वीडियो ट्वीट कर कहा कि “मध्यप्रदेश के बच्चे जिनके कंधों पर देश का भविष्य टिका है, उन्हें सम्मान की थाली तक नसीब नहीं — सरकार सिर्फ कागज़ों पर भोजन परोस रही है।”
राहुल गांधी का ट्वीट बना मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा —
“आज मध्यप्रदेश जा रहा हूं। और जब से ये खबर देखी है कि वहां बच्चों को मिड-डे मील अख़बार पर परोसा जा रहा है, दिल टूट गया है।
20 साल से ज्यादा की बीजेपी सरकार और बच्चों की थाली तक चुरा ली गई। शर्म आनी चाहिए ऐसे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को, जो देश के भविष्य का इस दुर्दशा से पालन-पोषण कर रहे हैं।”
ट्वीट के साथ साझा किया गया वीडियो नर्मदापुरम जिले के हुल्लापुर स्कूल का बताया गया है, जहां बच्चों को अखबार पर मिड-डे मील परोसा गया। यह वही मुद्दा है जिसे विंध्य वसुंधरा समाचार ने पिछले कई महीनों से रीवा-मऊगंज क्षेत्र के उदाहरणों के साथ लगातार उठाया है — कि रुचिकर भोजन सिर्फ रिकॉर्ड में है, बच्चों की थालियों में नहीं।
https://x.com/RahulGandhi/status/1987063941630206226?t=oh9cGOr9i1WqTybNm8fBUw&s=19
पत्रिका रिपोर्ट में दिखा ‘फर्क’
‘पत्रिका’ अख़बार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी के ट्वीट के बाद अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने उसी स्कूल में जाकर स्टील की थाली में खाना खाया और फोटो खिंचवाए।
हालाँकि, विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ दिखावे की कार्रवाई है — असल समस्या की जाँच और जवाबदेही अब तक नहीं हुई।
विंध्य वसुंधरा समाचार ने पहले ही बताया था कि रीवा–मऊगंज जिले के 90% से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में “रुचिकर भोजन” योजना केवल कागज़ी है, और महीनों से साझा चूल्हा का पैसा तक नहीं मिला। अब राहुल गांधी का ट्वीट इस क्षेत्रीय सच्चाई की राष्ट्रीय पुष्टि जैसा बन गया है।
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यह कटिंग पत्रिका समाचार अखबार की है। |
विंध्य वसुंधरा की पुरानी रिपोर्टों की पुष्टि
हमारी रिपोर्टों में बार-बार यह उजागर किया गया था कि —
साझा चूल्हा और स्कूल पोषण आहार योजना का धन महीनों से अटका हुआ है।
कई केंद्रों में बच्चों को सिर्फ रोटी-खिचड़ी या सूखी दाल दी जा रही है।
देवतालाब और मऊगंज ब्लॉक के अधिकारी जांच से बचते हैं, क्योंकि सत्य उजागर होने पर कार्रवाई का डर है।
जो शिक्षक या प्रधानाध्यापक गड़बड़ी की शिकायत करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी जाती है।
राहुल गांधी द्वारा साझा किया गया वीडियो इस बात का प्रमाण है कि यह समस्या किसी एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है।
राजनीति भी गरमाई — बीजेपी ने कहा “भ्रम फैलाना”
भाजपा मीडिया प्रभारी आशिष अग्रवाल ने बयान जारी कर कहा कि —
“राहुल गांधी भ्रमित राजनीति कर रहे हैं। सरकार ने पहले ही जांच कर कार्रवाई कर दी थी। विपक्ष केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहा है।”
हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि यदि कार्रवाई हुई होती, तो अखबार की थाली पर खाना खाने वाले बच्चे आज भी सोशल मीडिया पर क्यों दिख रहे हैं?
जमीनी हकीकत नहीं बदली
रीवा-मऊगंज समेत प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में आज भी बच्चों को वादा किया गया पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा।
अभिभावक परेशान हैं कि योजनाओं का लाभ कागज़ों में ही सीमित है।
एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा —
“अब तो राष्ट्रीय स्तर पर भी खुलासा हो गया है, उम्मीद है कि शासन–प्रशासन अब नींद से जागेगा।”
सत्ता पक्ष का कहना है कि योजनाएं सुचारू रूप से चालू है तो वायरल वीडियो का खंडन करना चाहिए । वहीं विपक्ष दिखा रहा है। असली योजनाएं क्या है। जबकि अधिकाश विद्यालयों में भोजन बनता ही नहीं है। स्थानीय विपक्ष के नेताओं को भी गांव स्तर में फैली अनियमिताओं का खुलासा करना चाहिए हर विद्यायल और आंगनवाडियों के।




