गढ़ ग्राम पंचायत में विद्युतीकरण योजनाओं पर बड़ा सवाल अभिलेखों में उजाला, धरातल पर अंधेरा — 24 लाख की योजना शक के घेरे में
ग्रामीणों का आरोप—फर्जी बिल, अवैध वेंडर, वर्षों से कार्य ‘चल रहा’ दिखाकर करोड़ों की बंदरबांट
रीवा जिले की मनगवा तहसील अंतर्गत जनपद पंचायत गंगेव की तीसरी–चौथी सबसे बड़ी ग्राम पंचायत गढ़ इन दिनों भारी अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। विद्युतीकरण और प्रकाश व्यवस्था से जुड़ी योजनाएँ, जो कागज़ों में पूरी दिखाई जा रही हैं, वे धरातल पर कहीं नजर नहीं आतीं
अभिलेखों में ‘पूर्ण’, लेकिन मौके पर अंधेरा
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में वर्षों पहले लगाए गए विद्युत खंभे आज भी बिना लाइन, बिना कनेक्शन और बिना लाइट के खड़े हैं, जबकि अभिलेखों में इन्हें ‘पूर्ण’ दर्शा दिया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में सीएम हेल्पलाइन 181 पर विस्तृत शिकायत दर्ज कर बैंक विवरण और अन्य प्रमाण भी उपलब्ध कराए हैं।
24 लाख की योजना सिर्फ कागज़ों पर?
सूत्रों के अनुसार पंचायत में लगभग 24 लाख रुपये की विद्युतीकरण योजना स्वीकृत हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी राशि अभिलेखों और फाइलों में खर्च दिखा दी गई, लेकिन जमीनी काम नगण्य है।
वर्तमान सरकार के जनप्रतिनिधियों ने भी इन अनियमितताओं पर खुलकर आपत्ति जताई है।
ग्रामीणों के अनुसार—
“खुद पंचायत प्रतिनिधियों ने माना है कि लगभग 10 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है।
फिर सवाल यह है कि यह पैसा किसके हिस्से गया — सरपंच, सचिव, ठेकेदार या विभाग?”
मरम्मत व सुधार के नाम पर लगातार खर्च, लेकिन स्थिति जस की तस
पंचायत अभिलेखों में हर साल मरम्मत व सुधार के नाम पर राशि खर्च तो दिखाई जाती है,
लेकिन ग्रामीणों की ज़मीन पर कोई सुधार दिखाई नहीं देता।
सबसे बड़ा प्रश्न—
क्या इन खर्चों की कभी वास्तविक जांच हुई? जिम्मेदारी किसकी तय है?
विधायक को भी सौंपा ज्ञापन, आश्वासन के बाद भी उदासी
ग्रामीणों ने पूरे मामले की शिकायत क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति से भी की थी।
विधायक ने आश्वासन दिया था कि—
गढ़ बाजार क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।
दोषियों पर कार्रवाई होगी।
लेकिन आज तक न तो प्रकाश व्यवस्था सुधरी और न ही किसी पर कार्रवाई।
पंचायत दर्पण पर खुली पोल—10 साल पुराने कार्य आज भी ‘चल रहे’ दिखाए गए
जब पंचायत की जानकारी पंचायत दर्पण पोर्टल से निकाली गई तो चौंकाने वाली बात सामने आई—
वर्ष 2016–17 के कार्य भी “कार्य प्रगति पर” दिख रहे हैं।
वर्ष 2025–26 तक के कार्य भी उसी शब्द में दर्ज हैं—“चल रहा है”।
ग्रामीणों का सवाल बड़ा है—
“जो काम 10 साल से ‘चल’ रहा है, वह आखिर चल कहां रहा है?”
फर्जी बिल और अवैध वेंडरों का खेल?
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में—
फर्जी बिल लगाकर राशि निकाली जाती है।
अवैध वेंडर बनाए जाते हैं, जिन्हें कुछ प्रतिशत देकर बिल पास करा दिए जाते हैं।
कई बार एक ही कार्य की राशि दोबारा निकाली गई, जबकि कार्य पहले से ही ‘पूर्ण’ दिखाया जा चुका था।
यह पूरा मामला साफ संकेत देता है कि—
“पैसा फेंक तमाशा देख”—भ्रष्टाचार नीचे से ऊपर तक चल रहा है।
प्रशासनिक पक्ष गायब
इस संबंध में अधिकारियों से बार-बार संपर्क का प्रयास किया गया,
लेकिन किसी का भी स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं मिला।









