गढ़ बाजार की पुरानी राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-27 सड़क निर्माण पर सवाल, पैचवर्क बना दिखावा विधायक के पत्र के बाद भी निर्माण सिर्फ दिखावा
राष्ट्रीय राज्यमार्ग 27 पुरानी राष्ट्रीय राजमार्ग 27 गढ़ क्षेत्र में चल रहे सड़क पैचवर्क कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। मौके पर मौजूद हालात साफ तौर पर यह दर्शाते हैं कि सड़क के दोनों ओर नालियों का निर्माण नहीं किया गया है। दुकानों, मकानों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाला पानी सीधे सड़क पर बह रहा है। इसी जलभराव के बीच डामर का पैचवर्क किया जा रहा है, जो तकनीकी रूप से टिकाऊ नहीं माना जाता।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पानी के ऊपर किया गया यह पैचवर्क कुछ ही समय में उखड़ जाएगा। पहले भी इसी तरह की मरम्मत कराई जा चुकी है, लेकिन हर बार कुछ दिनों या महीनों बाद सड़क की हालत फिर पहले जैसी हो जाती है। इससे न सिर्फ आम जनता को परेशानी होती है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी बताया और कहा कि जब तक नाली और स्थायी सड़क का निर्माण एक साथ नहीं होगा, तब तक ऐसी मरम्मत केवल दिखावा ही साबित होगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार समाचार पत्रों में इस सड़क की बदहाली को लेकर खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके बाद मनगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति ने रीवा कलेक्टर को पत्र लिखकर सड़क निर्माण की मांग की थी। बावजूद इसके, क्षेत्रवासियों का आरोप है कि आज भी निर्माण कार्य केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित है।
स्थानीय लोगों ने यह मुद्दा भी उठाया है कि यही स्थिति पुरानी राष्ट्रीय राजमार्ग-27 में चल रहे निर्माण कार्य में भी देखने को मिल रही है। सड़क निर्माण के नाम पर वहां भी लीपा-पोती और पैचवर्क किया जा रहा है। जगह-जगह सड़क को उखाड़कर केवल ऊपर से डामर डाल दिया जा रहा है, जबकि जलनिकासी, मजबूती और स्थायित्व पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
नागरिकों का कहना है कि पुरानी एनएच-27, हर जगह एक ही तरह की समस्या है—अस्थायी पैचवर्क। लोगों की मांग है कि पूरे क्षेत्र में पीसीसी (कंक्रीट) सड़क और दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण एक साथ कराया जाए। यदि दो से तीन किलोमीटर के हिस्से में एकमुश्त ठोस परियोजना स्वीकृत कर दी जाए, तो बार-बार मरम्मत पर होने वाला खर्च और जनता के टैक्स की बर्बादी रोकी जा सकती है।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर समस्या को लेकर ठोस और स्थायी निर्णय लिया जाएगा, या फिर थानागढ़ से लेकर पुरानी राष्ट्रीय राजमार्ग-27 तक सड़क निर्माण के नाम पर केवल पैचवर्क और लीपा-पोती का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।



