मऊगंज जिले के खरीदी केंद्रों में दलालों का खुला राज, प्रशासनिक लापरवाही से किसान बेहाल
मऊगंज जिले में संचालित शासकीय खरीदी केंद्र इन दिनों अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और बेलगाम दलालों के कारण गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। जिन केंद्रों का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना था, वही केंद्र आज शोषण, डर और अवैध वसूली के अड्डे बनते जा रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए मजबूरी में अपमान और आर्थिक नुकसान सहने को विवश हैं।
खरीदी केंद्रों पर वास्तविक जिम्मेदार कर्मचारियों की मौजूदगी नाममात्र की रह गई है। इसके विपरीत, दिनभर दलालों का जमावड़ा देखने को मिलता है, जो पूरी प्रक्रिया को अपने इशारों पर संचालित कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बिना दलाल के माध्यम से गए उनकी फसल तौली ही नहीं जाती। तौल प्रक्रिया में खुली धांधली की जा रही है—कभी वजन कम बताया जाता है तो कभी नमी के नाम पर अनावश्यक कटौती कर दी जाती है। इससे किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब शाम ढलते ही खरीदी केंद्रों का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। शाम सात–आठ बजे के बाद केंद्रों पर शराबखोरी, गाली-गलौज और आपसी झगड़े आम हो जाते हैं। असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने से किसान अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं। कई किसानों का कहना है कि वे डर के कारण समय से पहले केंद्र छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे उन्हें अपनी पूरी उपज बेचने का मौका भी नहीं मिल पाता।
किसानों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बाद जब निरीक्षण के लिए मौके पर अधिकारी पहुंचे, तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आई। ऐसा प्रतीत हुआ मानो किसी भी समय गंभीर विवाद या अप्रिय घटना घट सकती है। सबसे गंभीर बात यह है कि कई खरीदी केंद्र शासकीय भूमि पर न होकर निजी जमीन पर संचालित किए जा रहे हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद न तो प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि मंत्री के गांव में स्थित खरीदी केंद्र की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। वहां भी वही अव्यवस्था, वही दलाली और वही मनमानी देखने को मिल रही है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि व्यवस्था में सुधार के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि वास्तव में प्रशासन निष्पक्ष जांच करना चाहता है, तो उसे दिन में नहीं बल्कि शाम आठ बजे के बाद अचानक निरीक्षण करना चाहिए। तब असली सच्चाई सामने आएगी और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।
मऊगंज जिले में पहले ही यह चर्चा आम रही है कि थानों और विभागों पर राजनीतिक दबाव हावी रहता है। अब वही हालात खरीदी केंद्रों में भी देखने को मिल रहे हैं। नेताओं और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में दलाल खुलेआम सक्रिय हैं और किसान बेबस होकर सब सहने को मजबूर हैं।
कुल मिलाकर, मऊगंज जिले की खरीदी व्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो न केवल किसानों का आर्थिक नुकसान बढ़ेगा, बल्कि शासन-प्रशासन की साख पर भी गहरा सवाल खड़ा हो जाएगा। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर सख्त कदम उठाएं, ताकि किसानों को उनका हक मिल सके और खरीदी व्यवस्था पर से उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।

