रीवा–मऊगंज में परिवहन विभाग का नियंत्रण ढीला, अवैध वसूली का शिकार हो रहे यात्री
बिना वर्दी–नेम प्लेट दौड़ रहे वाहन, किराया सूची नदारद, नियमों की उड़ रही धज्जियां
रीवा/मऊगंज। रीवा और मऊगंज दोनों जिलों में परिवहन विभाग की लापरवाही अब खुलकर सामने आने लगी है। शहरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक सड़कों पर दौड़ रहे ऑटो, यात्री वाहन और स्कूल वाहन नियम-कायदों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं। हालात यह हैं कि न तो वाहनों पर निर्धारित वर्दी और नेम प्लेट दिखाई देती है और न ही किराया सूची, जिससे आम यात्री आए दिन अवैध वसूली का शिकार हो रहे हैं।
बिना वर्दी, बिना पहचान—कैसे होगी जवाबदेही?
रीवा और मऊगंज जिले में अधिकांश ऑटो एवं सवारी वाहन चालक बिना वर्दी और बिना नेम प्लेट के ही वाहन चला रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी यात्री के साथ कोई दुर्घटना या विवाद हो जाए तो चालक की पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह लापरवाही सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
किराया सूची गायब, मनमानी वसूली आम
नियमों के अनुसार प्रत्येक यात्री वाहन में किराया सूची का स्पष्ट रूप से लगाया जाना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। रीवा और मऊगंज दोनों जिलों में अधिकांश ऑटो और सवारी वाहनों में किराया सूची नहीं मिलती। नतीजतन, यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जाता है। कई बार मामूली दूरी के लिए भी तय दर से कहीं अधिक पैसा वसूलने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
स्कूल वाहन भी नियमों से बेपरवाह
सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूल वाहनों की है। बच्चों को ढोने वाले कई वाहन न तो फिटनेस मानकों पर खरे उतरते हैं और न ही उनके चालकों के पास वर्दी या पहचान पत्र होता है। यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
चौराहों पर जाम, यातायात व्यवस्था ध्वस्त
रीवा और मऊगंज के प्रमुख चौराहों—हनुमना बाजार, देवतालाब, ब्लॉक चौराहा, पुराना बस स्टैंड, गढ़ मोड़, नईगढ़ी, खटखरी, शाहपुर गढ़ गंगेव कटरा लोरी मोड कटरा सहित अन्य इलाकों में ऑटो चालकों का जमावड़ा आम बात हो गई है। जहां मन हुआ वहीं वाहन खड़ा कर सवारी बैठाने और उतारने से आए दिन जाम की स्थिति बनती है, जिससे आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
आरटीओ की कार्रवाई सवालों के घेरे में
परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह नियमित जांच कर अवैध रूप से चल रहे वाहनों पर सख्त कार्रवाई करे, लेकिन रीवा और मऊगंज दोनों जिलों में यह जिम्मेदारी केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है। बताया जा रहा है कि आरटीओ की उड़नदस्ता टीम महीने में एक-दो बार औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है। अधिकांश कार्रवाई केवल चेक पोस्ट तक सीमित रहती है, जबकि अंदरूनी इलाकों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार बढ़ रही अव्यवस्था और अवैध वसूली से आम नागरिकों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि यदि परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस ईमानदारी से मैदान में उतरकर नियमित जांच अभियान चलाए, तो न सिर्फ यातायात व्यवस्था सुधरेगी बल्कि यात्रियों को भी राहत मिलेगी।
सख्त कार्रवाई की दरकार
अब जरूरत है कि रीवा और मऊगंज जिले में परिवहन विभाग ठोस कदम उठाए। बिना फिटनेस, बिना परमिट, बिना वर्दी और बिना नेम प्लेट चलने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो, किराया सूची अनिवार्य रूप से लागू की जाए और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। तभी आम जनता को अव्यवस्था और अवैध वसूली से निजात मिल सकेगी।
