रीवा–मऊगंज में कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल: वायरल ऑडियो से उठी शंका, SIT जांच की मांग तेज
सामाजिक कार्यकर्ता बी. के. माला ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
रीवा। रीवा और मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार नए विवाद सामने आ रहे हैं। हाल ही में वायरल हुए एक कथित ऑडियो ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक अधिकारी द्वारा आदेश की प्रक्रिया से जुड़े मामले में पैसे के लेन-देन और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम लेने जैसी बातें कही गई हैं। इस पूरे प्रकरण के बाद अब उच्चस्तरीय SIT जांच की मांग तेज हो गई है।
कलेक्टर का नाम लेकर लेन-देन की बात?—सवालों का बड़ा घेऱा
वायरल ऑडियो में यह दावा किया गया कि किसी आदेश को टर्मिनेट करने या बनाए रखने के नाम पर पैसे की मांग की गई और बातचीत में कलेक्टर का नाम भी लिया गया। इससे यह प्रश्न उठने लगे कि —
क्या वाकई किसी वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी में ऐसा लेन-देन हुआ?
क्या पूर्व की जांचों पर भी इसी तरह का प्रभाव था?
सामाजिक कार्यकर्ता बी. के. माला की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता बी. के. माला ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि—
“यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यदि ऑडियो में कही गई बातें सत्य पाई जाती हैं तो रीवा और मऊगंज में भ्रष्टाचार की जड़ें बेहद गहरी हैं। सवाल यह है कि पैसा कहाँ से आ रहा है, कहाँ जा रहा है और किस स्तर तक पहुँच रहा है? इन आरोपों की जाँच केवल SIT ही निष्पक्ष रूप से कर सकती है।”
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी अधिकारी का नाम शामिल है, चाहे वह जिला प्रशासन से जुड़ा हो या पंचायत से, सभी को जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि—
“यदि करोड़ों के भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं, तो जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि संरक्षण किसका है और यह नेटवर्क कहाँ तक फैला है। सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।”
“क्या भ्रष्टाचार की रकम ऊपर तक जा रही?”—जनता का सवाल
रीवा संभाग में पंचायतों और विभिन्न विभागों में पिछले वर्षों के कथित घोटालों को लेकर पहले भी आवाज उठती रही है। अब नए ऑडियो के बाद ये सवाल और गहरे हो रहे हैं कि—
भ्रष्टाचार का यह सिस्टम किसके संरक्षण में चल रहा है?
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कौन-कौन शामिल हो सकते हैं?
क्या यह पैसा ऊपर तक पहुँच रहा है?
जिला पंचायत का मामला फिर चर्चा में
कुछ समय पहले जिला पंचायत से संबंधित फाइलों को रोकने, दबाव बनाने और अवैध मांगों को लेकर वायरल हुए मामलों ने भी प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे। अब नया ऑडियो उन्हीं आशंकाओं को फिर जीवित कर रहा है।
न्यायालय पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी—मामला और गंभीर
वायरल ऑडियो में न्यायालय और हाईकोर्ट के प्रति कथित रूप से अमर्यादित टिप्पणियाँ भी मामले को और गंभीर बना रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अमानना की श्रेणी में आ सकती है।
SIT गठन की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई जनप्रतिनिधियों ने एकमत होकर कहा है कि—
मामले की निष्पक्ष SIT जांच
संबंधित सभी अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ
कथित लेन-देन की रकम, स्रोत और लाभार्थियों की पहचान
पूर्व के भ्रष्टाचार मामलों से लिंक की जाँच
बहुत आवश्यक है।
सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा
क्योंकि ऑडियो में कथित रूप से सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों के नाम आ रहे हैं, इसलिए सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिकों का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता बनी रहे।

