रीवा–मऊगंज में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी का बोलबाला — प्रशासन की आंखों के सामने चल रहा जहर का कारोबार
विंध्य क्षेत्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार लगातार गहराता जा रहा है और प्रशासनिक सख्ती के अभाव में यह अब एक संगठित उद्योग का रूप ले चुका है। विंध्य वसुंधरा समाचार बीते एक वर्ष से इस मुद्दे को निरंतर उठाता आया है, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभाग द्वारा कभी-कभार की जा रही औपचारिक कार्रवाई केवल दिखावा प्रतीत होती है, जबकि मिलावटखोर बेधड़क काम कर रहे हैं।
ताज़ा मामला: पनीर में गहरी मिलावट, पर मामला इससे भी व्यापक
कुछ दिन पहले पनीर में भारी मिलावट पकड़े जाने ने पूरे क्षेत्र में खलबली मचा दी। लेकिन सच्चाई यह है कि यह केवल एक छोटा उदाहरण है। रिपोर्टों और शिकायतों के अनुसार—
दूध व खावा,
घी व खाद्य तेल,
मसाले व मिठाइयाँ,
पैक्ड स्नैक्स व बेकरी आइटम
लगातार मिलावटखोरी का शिकार हैं।
शादी–विवाह और त्यौहारों के मौसम में यह अवैध कारोबार सबसे अधिक सक्रिय हो जाता है। लोग स्वादिष्ट भोजन के लिए पैसा खर्च करते हैं, पर उन्हें पता नहीं होता कि यही भोजन उनके परिवार और मेहमानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
गरीब की मेहनत पर प्रहार, मेहमानों की जान पर संकट
विंध्य क्षेत्र में एक गरीब परिवार भी सम्मान के लिए अपनी वर्षों की कमाई खर्च कर विवाह समारोह आयोजित करता है।
लेकिन मिलावटी खाद्य पदार्थ उनके सपनों की दावत को दुर्घटना और बीमारी में बदल सकते हैं।
आज स्थिति यह है कि स्वाद के नाम पर जहर परोसा जा रहा है और प्रशासनिक मशीनरी इसे रोकने में नाकाम दिख रही है।
खाद्य विभाग की जांच व्यवस्था सवालों के घेरे में
विंध्य वसुंधरा समाचार द्वारा किए गए लगातार सवाल अब भी अनुत्तरित हैं—
रीवा–मऊगंज क्षेत्र में कौन-कौन से खाद्य पदार्थ किस प्रदेश से आयात हो रहे हैं?
कौन-सी सामग्री यहाँ से दूसरे जिलों में निर्यात की जा रही है?
पिछले एक वर्ष में खाद्य विभाग ने कितनी बार वास्तविक जांच की?
जांच अधिकारी कौन थे और उनकी रिपोर्टें कहाँ हैं?
कुछ कर्मचारियों की संपत्ति में तेजी से हुई बढ़ोतरी का स्रोत क्या है?
इन प्रश्नों के उत्तर न मिलना स्वयं संकेत है कि कहीं न कहीं तंत्र के भीतर ही गंभीर खामियाँ हैं।
प्रशासनिक नींद कब टूटेगी?
यह मुद्दा केवल मिलावट का नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन का सवाल है।
इसलिए आवश्यक है कि—
1. खाद्य आपूर्ति नेटवर्क की संपूर्ण जांच कर वास्तविक दोषियों को चिन्हित किया जाए।
2. खाद्य विभाग के कर्मचारियों की संपत्तियों का विस्तृत ऑडिट कराया जाए।
3. मिलावट करने वालों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और स्थानीय जनप्रतिनिधि तत्काल हस्तक्षेप करें।



