थानों में जब्त वाहन बन रहे चोरी का आसान निशाना! पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षित नहीं वाहन, कीमती पुर्जे और बैटरियां गायब
सड़क दुर्घटनाओं, आपराधिक मामलों एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत पुलिस थानों में जब्त कर खड़े किए गए वाहन अब खुद असुरक्षित हो गए हैं। आम नागरिक जिस वाहन को कानून की निगरानी में सुरक्षित मानकर थाने के परिसर में छोड़ते हैं, वही वाहन धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो रहा है। हालात यह हैं कि थानों में खड़े वाहनों से कीमती पुर्जों की चोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे वाहन मालिकों में भारी आक्रोश और असंतोष है।
थाने के भीतर ही ‘पार्ट्स चोरी’ का खेल?
सूत्रों और पीड़ित वाहन मालिकों के अनुसार, थानों में लंबे समय से खड़े वाहनों से टायर, हेडलाइट, साइड मिरर, स्टेपनी और विशेष रूप से महंगी बैटरियां गायब हो रही हैं। कई मामलों में वाहन छुड़ाने पहुंचे मालिकों को तब झटका लगा, जब उन्हें बताया गया कि उनके वाहन की स्थिति पहले जैसी नहीं रही।
एक वाहन मालिक ने बताया कि दुर्घटना के बाद उसकी चार पहिया गाड़ी थाने में खड़ी की गई थी। महीनों बाद जब कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर वह वाहन लेने पहुंचा, तो गाड़ी से बैटरी और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे नदारद थे। वहीं, कुछ दोपहिया वाहन मालिकों का कहना है कि उनकी गाड़ियों के टायर और लाइट तक बदल दिए गए।
एक थाने की नहीं, कई जगहों की कहानी
यह समस्या केवल किसी एक थाने तक सीमित नहीं है। शहर और जिले के कई थानों से ऐसे ही आरोप सामने आ रहे हैं। लंबे समय तक खुले परिसर में बिना किसी निगरानी के खड़े वाहनों की कोई नियमित जांच नहीं होती। न तो वाहन की स्थिति का समय-समय पर रिकॉर्ड रखा जाता है और न ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि वाहन सुरक्षित हालत में हैं या नहीं।
न निगरानी, न रिकॉर्ड—जिम्मेदारी किसकी?
नियमों के अनुसार, जब्त किए गए वाहन पुलिस की अभिरक्षा में रखी गई संपत्ति (Case Property) माने जाते हैं, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित थाने की होती है। बावजूद इसके, न तो थानों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देती है और न ही सीसीटीवी कैमरों की प्रभावी निगरानी। कई थानों में वाहन खुले आसमान के नीचे खड़े रहते हैं, जिससे न सिर्फ चोरी बल्कि मौसम की मार से भी उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।
अधिकारियों की चुप्पी, सवालों से बचता विभाग
जब इस गंभीर मुद्दे पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो किसी ने भी स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। अधिकारियों का कहना है कि बिना औपचारिक जांच और रिपोर्ट के कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, यह भी सच है कि विभागीय स्तर पर अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि कितने वाहनों के पुर्जे चोरी हुए हैं और इसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
गोपनीय भौतिक सत्यापन से सामने आ सकती है हकीकत
यदि निष्पक्ष और गोपनीय तरीके से सभी थानों में खड़े जब्त वाहनों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए, तो चोरी और लापरवाही की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। वाहन मालिकों से सीधे बातचीत करने पर कई ऐसे मामले उजागर हो सकते हैं, जो अब तक थाने की फाइलों में दर्ज ही नहीं हैं।
आम जनता का भरोसा हो रहा कमजोर
पुलिस अभिरक्षा में रखे गए वाहनों की यह स्थिति कानून व्यवस्था पर आम नागरिकों के भरोसे को कमजोर करती है। सवाल यह है कि जब थाने में खड़ा वाहन सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी अपनी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर कैसे आश्वस्त हो?
अब वरिष्ठ अधिकारियों को लेना होगा सख्त निर्णय
यह मामला अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासन के लिए गंभीर विचारणीय विषय बन चुका है। थानों में खड़े वाहनों की सुरक्षा के लिए अलग परिसर, नियमित निरीक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी निगरानी और जवाबदेही तय करना समय की मांग है। जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक ‘थानों में वाहन चोरी’ की आशंका बनी रहेगी।


