🚨 रीवा संभाग में अवैध उत्खनन का जाल: छह जिलों में अरबों का राजस्व नुकसान, विशेष टीम गठन की मांग तेज
रीवा। रीवा संभाग के छह जिलों में इन दिनों अवैध उत्खनन का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। पत्थर, पटिया, बालू और मोरम का बड़े पैमाने पर बिना अनुमति खनन किए जाने से शासन को प्रतिमाह अरबों रुपये के राजस्व की क्षति होने का अनुमान है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि खनन माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में दिन-रात भारी मशीनों से उत्खनन जारी है। बिना रॉयल्टी और बिना वैध परमिट के ट्रैक्टर-ट्रॉली व डंपरों से खनिज सामग्री का परिवहन खुलेआम हो रहा है। इससे न केवल शासन को राजस्व हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
🌾 देवरी के कुबरी में किसानों पर संकट
विशेष रूप से देवरी ग्राम पंचायत के कुबरी क्षेत्र में संचालित सुखदेव प्रसाद गोयनका की खदान को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि खदान संचालन से निकलने वाली धूल और बारूद के धमाकों से खेत-खलिहान बर्बाद हो रहे हैं। फसलों पर मोटी धूल जमने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है और आसपास के घरों में दरारें तक आ गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद खनिज एवं प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन की निष्क्रियता से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
💰 अरबों का राजस्व नुकसान
जानकारों का अनुमान है कि यदि वैध रूप से खनन कराया जाए तो शासन को प्रतिमाह भारी राजस्व प्राप्त हो सकता है, किंतु अवैध उत्खनन के कारण यह राशि सीधे तौर पर माफियाओं की जेब में जा रही है। इससे विकास कार्यों के लिए मिलने वाली धनराशि भी प्रभावित हो रही है।
⚖️ संभागीय आयुक्त से विशेष टीम गठित करने की मांग
स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने रीवा में पदस्थ संभागीय आयुक्त से मांग की है कि छहों जिलों में विशेष जांच टीम गठित कर व्यापक अभियान चलाया जाए। ड्रोन सर्वे, संयुक्त छापेमारी और खनिज परिवहन की सख्त निगरानी के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।
साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरणीय मानकों की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
❓कब जागेगा प्रशासन?
किसानों का कहना है कि “हमारी छाती पर खदान चल रही है, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं।” यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक जनआंदोलन की चेतावनी दी गई है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब संज्ञान लेता है और अवैध उत्खनन के इस खेल पर कब तक अंकुश लगता है।

