रीवा–मऊगंज जिले में हजारों करोड़ की जल जीवन मिशन योजना पर सवाल, पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी को मोहताज
रीवा। जिले में करोड़ों नहीं बल्कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से संचालित जल जीवन मिशन योजना के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं होने का मामला गंभीर रूप से सामने आ रहा है। रीवा जिले में लगभग 12 हजार करोड़ रुपये तथा मऊगंज क्षेत्र में करीब 8 हजार करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन के तहत कार्य कराए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
विशेष रूप से रीवा और मऊगंज के संताली एवं पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण आज भी पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर धन खर्च होने के बावजूद न तो नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी है और न ही स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
जल टंकियों की सफाई वर्षों से नहीं
ग्रामीणों के अनुसार जब से जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकियां और पाइपलाइनें बनाई गईं, उसके बाद से अधिकांश स्थानों पर टंकियों की नियमित सफाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगह 15–20 वर्षों से जल टंकियों की सफाई नहीं कराई गई है।
कुछ ग्रामीणों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कई जल टंकियों की सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं है। टंकियों की सीढ़ियां तक क्षतिग्रस्त या हट चुकी हैं, जिससे रखरखाव कार्य संभव नहीं हो पा रहा है।
दूषित पानी की आपूर्ति का आरोप
सिरमौर और आसपास के क्षेत्रों से सामने आई शिकायतों के अनुसार कई जल टंकियों में सुरक्षा जाली तक नहीं लगी है, जिससे पक्षियों के अवशेष और गंदगी टंकियों में गिरती रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार टंकियों में पक्षियों के मृत अवशेष और गंदगी देखी गई है, जिससे दूषित पानी की आपूर्ति होने की आशंका बनी रहती है।
गढ़ बाजार क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि इसी प्रकार का पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं।
संताली और पहाड़ी क्षेत्रों में पेयजल संकट
रीवा और मऊगंज के दूरस्थ पहाड़ी एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में आज भी लोग पेयजल के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और रखरखाव की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।
ग्रामीणों में भय और नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से समस्या उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। कई लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने से आमजन में निराशा का माहौल है।
जांच और सुधार की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
सभी जल टंकियों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए
दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तत्काल की जाए
जल गुणवत्ता की नियमित जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो यह गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बन सकती है।



