रीवा संभाग में भूमि अभिलेखों की गंभीर त्रुटियां, निजी जमीनें रिकॉर्ड में ‘शासकीय’ दर्ज — हजारों भू-स्वामी परेशान
रीवा। मध्य प्रदेश के राजस्व प्रशासन में डिजिटल सुधारों और ई-गवर्नेंस के बड़े दावों के बीच एक गंभीर प्रशासनिक समस्या सामने आई है। प्रदेश के कई जिलों, विशेष रूप से रीवा संभाग में भूमि अभिलेखों में हुई व्यापक त्रुटियों ने हजारों किसानों और भू-स्वामियों को भारी परेशानी में डाल दिया है।
जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में निजी स्वामित्व वाली भूमियों को गलती से ‘शासकीय भूमि’ के रूप में दर्ज कर दिया गया है। यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि प्रभावित नागरिकों के संपत्ति संबंधी संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रभाव डालने वाला मामला माना जा रहा है।
प्रक्रिया पूरी, फिर भी अंतिम स्वीकृति लंबित
मामले की गंभीरता इस तथ्य से स्पष्ट होती है कि प्रभावित भू-स्वामियों ने भूमि अभिलेख सुधार के लिए निर्धारित सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
नियमानुसार संबंधित तहसीलदारों एवं अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) द्वारा दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा चुकी है। जांच के उपरांत रिकॉर्ड सुधार के लिए स्पष्ट अनुशंसा भी उच्च स्तर पर भेज दी गई है।
इसके बावजूद अधिकांश प्रकरण ‘कलेक्टर लॉगिन आईडी’ स्तर पर लंबित पड़े हुए हैं। महीनों बीत जाने के बाद भी अंतिम अनुमोदन नहीं मिल सका है। प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जब जमीनी स्तर पर जांच पूर्ण हो चुकी है, तो अंतिम स्वीकृति में इतना विलंब क्यों हो रहा है।
किसानों और भू-स्वामियों पर दोहरा संकट
भूमि अभिलेखों में त्रुटियों के कारण प्रभावित नागरिकों को अनेक प्रकार की व्यावहारिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं—
1. वित्तीय संकट गहराया
रिकॉर्ड में निजी भूमि के स्थान पर ‘शासकीय’ दर्ज होने से बैंक किसानों को फसल ऋण (केसीसी) या अन्य ऋण उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। इससे कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
2. भूमि क्रय-विक्रय पर रोक
अपनी ही भूमि होने के बावजूद भू-स्वामी उसे बेच नहीं पा रहे हैं। इससे शिक्षा, विवाह, चिकित्सा जैसे आवश्यक कार्यों के लिए धन जुटाना कठिन हो गया है।
3. नामांतरण एवं बंटवारा प्रभावित
पारिवारिक बंटवारे और नामांतरण की प्रक्रियाएं बाधित हो गई हैं, जिससे भविष्य में भूमि विवाद बढ़ने की आशंका है।
4. सरकारी योजनाओं से वंचित
कई सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ लेने के लिए सही भू-अभिलेख आवश्यक होते हैं। त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड के कारण पात्र नागरिक योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
उच्च स्तर पर पहुंची शिकायत
प्रशासनिक स्तर पर समाधान न मिलने से प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों ने अब उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। इस संबंध में विस्तृत शिकायत पत्र संभागीय आयुक्त रीवा तथा राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव को भोपाल में प्रेषित किया गया है।
शिकायत में लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण न होने की स्थिति को प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि जब तकनीकी रूप से रिकॉर्ड सुधार संभव है और जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो कलेक्टर स्तर पर फाइलों का महीनों तक लंबित रहना उचित नहीं माना जा सकता।
प्रभावितों की प्रमुख मांगें
प्रभावित भू-स्वामियों और नागरिकों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
कलेक्टर लॉगिन पर लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु विशेष समय-सीमा निर्धारित की जाए।
भविष्य में निजी भूमि को शासकीय दर्ज होने जैसी त्रुटियों को रोकने के लिए डिजिटल पोर्टल में तकनीकी सुधार किए जाएं।
लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
क्या मिलेगा प्रभावितों को न्याय?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रीवा संभाग सहित प्रदेश का राजस्व प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता दिखाता है। क्या प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों को समय पर उनका अधिकार मिल सकेगा या उन्हें इसी प्रकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच भटकना पड़ेगा — यह आने वाला समय बताएगा।

