गैंगरेप व पॉक्सो एक्ट मामले में दो आरोपी दोषमुक्त, न्यायालय ने साक्ष्य अपर्याप्त माना
देवसर (जिला सिंगरौली), 13 मार्च 2026। गैंगरेप एवं पॉक्सो एक्ट से जुड़े बहुचर्चित मामले में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश, देवसर (जिला सिंगरौली) की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया। विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 35/2025, शासन बनाम मो. रसीद व अन्य में माननीय न्यायालय ने सुनवाई पूर्ण होने के बाद मो. रसीद एवं इकराम अंसारी को आरोपों से बरी कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, 14 वर्षीय किशोरी के पिता ने 30 मई 2025 की सुबह थाना जियावन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी पुत्री रात 12 बजे से घर से लापता है। इस शिकायत पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 223/2025 के तहत धारा 137(2) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज कर तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान उसी दिन शाम लगभग 4 बजे किशोरी नर्सरी के पास मिली।
पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि वह रात में शौच के लिए घर से बाहर निकली थी, तभी आरोपियों—मो. रसीद, मो. जिबरिल (दोनों निवासी जियावन, थाना जियावन, जिला सिंगरौली) तथा उनके रिश्तेदार इकराम अंसारी (निवासी सीतापुर, थाना लौर, जिला मऊगंज)—ने उसका मुंह दबाकर अपहरण कर लिया। उसने आरोप लगाया कि तीनों ने अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने प्रकरण में गंभीर धाराओं का इजाफा करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 87, 65(1), 70(2), 351(3) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5(g)/6 के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने 1 जून 2025 को मो. रसीद और इकराम अंसारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जबकि तीसरा आरोपी मो. जिबरिल अभी भी फरार बताया गया है। विवेचना पूर्ण होने के बाद 26 अगस्त 2025 को पुलिस ने आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता और उसके परिजनों सहित अन्य गवाहों के बयान दर्ज कराए। हालांकि, न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। इसी आधार पर न्यायालय ने 13 मार्च 2026 को अपना निर्णय सुनाते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया।
प्रकरण में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता कुलदीप सिंह सोमवंशी ने पैरवी की, जिनका सहयोग जूनियर अधिवक्ता सुधाकर द्विवेदी ने किया।
उल्लेखनीय है कि मामले का एक आरोपी मो. जिबरिल अभी भी फरार है, जिसकी तलाश पुलिस द्वारा जारी बताई जा रही है। न्यायालय के इस निर्णय के बाद क्षेत्र में विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

