हरिजन एक्ट व मारपीट के मामले में पिता-पुत्र बरी, साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने किया दोषमुक्त घोषित
करीब छह वर्ष पुराने हरिजन एक्ट एवं मारपीट के एक मामले में विशेष न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) न्यायालय रीवा के माननीय न्यायाधीश ने विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक SCATR 162/2020 शासन बनाम प्रमोद सोधिया एवं अन्य में मंगलवार 10 मार्च 2026 को निर्णय सुनाते हुए आरोपी रामलल्लू सोधिया एवं प्रमोद सोधिया को आरोपों से बरी कर दिया।
मामले के अनुसार फरियादी सुनील रावत, निवासी ग्राम शिवपूर्वा, ने 4 जुलाई 2020 को अजाक थाना रीवा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि 1 जुलाई 2020 को शिवपूर्वा कस्बे में उसकी आरोपी रामलल्लू सोधिया और प्रमोद सोधिया से मामूली बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। आरोप था कि विवाद के दौरान रामलल्लू सोधिया ने उस पर खौलती हुई केतली से गर्म चाय डाल दी, जिससे वह झुलस गया। इसके साथ ही आरोपियों द्वारा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करने तथा लाठी-डंडों से मारपीट करने का आरोप लगाया गया था।
फरियादी के अनुसार मारपीट में उसका एक हाथ फ्रैक्चर हो गया था तथा सिर में भी सामान्य चोट आई थी। घटना के दौरान उसके शोर मचाने पर गांव के अन्य लोग मौके पर पहुंच गए थे, जिसके बाद आरोपी वहां से चले गए। घटना के बाद फरियादी का उपचार संजय गांधी अस्पताल रीवा में 1 जुलाई से 4 जुलाई 2020 तक चला था। उपचार के उपरांत उसने अजाक थाना रीवा में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
शिकायत के आधार पर अजाक थाना रीवा पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 20/2020 दर्ज करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 324, 506/34 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(D), 3(1)(Dh) एवं 3(2)(Va) के तहत मामला कायम किया था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया और विवेचना पूरी होने के बाद 6 अक्टूबर 2020 को चालान न्यायालय में पेश किया गया था।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान का परीक्षण किया गया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने तथा उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद न्यायालय ने 10 मार्च 2026 को अपना निर्णय सुनाते हुए आरोपी रामलल्लू सोधिया एवं प्रमोद सोधिया, दोनों निवासी ग्राम शिवपूर्वा थाना गोविंदगढ़ जिला रीवा को दोषमुक्त घोषित कर दिया।
इस प्रकरण में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता कुलदीप सिंह सोमवंशी ने न्यायालय में पैरवी की। न्यायालय के फैसले के बाद दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से राहत मिल गई।

