ग्राम पंचायत गढ़ में विकास कार्यों पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने आयुक्त से की निष्पक्ष जांच की मांग
रीवा। जिले की जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गढ़ में विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पंचायत में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों से नाराज ग्रामीणों ने मामले की शिकायत रीवा संभाग के आयुक्त से करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पंचायत में कई विकास कार्यों और योजनाओं के नाम पर राशि तो निकाली गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य या तो अधूरे हैं या फिर गुणवत्ता विहीन तरीके से किए गए हैं। इससे पंचायत में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आवेदन के अनुसार, वर्ष 2023 से अब तक बाजार बैठकी (हाट-बाजार ठेका) की राशि का सही लेखा-जोखा पंचायत अभिलेखों में स्पष्ट नहीं है। आरोप है कि बाजार ठेके से प्राप्त होने वाली राशि न तो पंचायत खाते में पारदर्शी तरीके से दर्ज की गई और न ही ग्रामसभा में इसकी पूरी जानकारी दी गई। जबकि ग्रामसभा के प्रस्ताव क्रमांक 03 दिनांक 2 अक्टूबर 2025 में बाजार बैठकी की अनुमानित राशि करीब 1.50 लाख से 2 लाख रुपये बताई गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त राशि का उपयोग किस कार्य में किया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसी तरह पंचायत में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि कई महीनों से पंचायत खाते से स्ट्रीट लाइट के नाम पर राशि निकाली जा रही है, लेकिन गांव के कई हिस्सों में आज भी अंधेरा बना हुआ है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि प्रकाश व्यवस्था के नाम पर राशि का समुचित उपयोग नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने नाली निर्माण कार्यों में भी अनियमितता का आरोप लगाया है। बताया गया कि कुछ स्थानों पर नाली निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन वह अधूरा छोड़ दिया गया, वहीं कई जगह निर्माण कार्य शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं कराया गया।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक आदिवासी परिवार के घर से बायपास मार्ग की ओर बनने वाली नाली के निर्माण के लिए लगभग 1.50 लाख रुपये की राशि करीब छह माह पहले ही निकाल ली गई, लेकिन आज तक कार्य पूरा नहीं किया गया। इससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इसके अलावा सार्वजनिक कुएं और पुरानी गल्ला मंडी क्षेत्र से जुड़े कार्यों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन कार्यों के लिए राशि स्वीकृत होने के बावजूद कार्य अधूरे पड़े हुए हैं, जिससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर संदेह उत्पन्न हो रहा है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पंचायत में हितग्राही मूलक योजनाओं और तालाब निर्माण कार्यों में भी अनियमितता की आशंका है। आरोप है कि कुछ पुराने कार्यों को नया दर्शाकर स्वीकृति ली गई और राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया।
सबसे गंभीर आरोप मनरेगा योजना को लेकर लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत फर्जी मजदूरों के नाम से भुगतान निकाला जा रहा है। आरोप है कि सरपंच के करीबी लोगों के खातों में मजदूरी की राशि डालकर उससे पैसे वापस ले लिए जाते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि फर्जी मजदूरों को केवल 200 से 400 रुपये देकर बाकी राशि वापस ले ली जाती है, जिससे शासन की महत्वपूर्ण योजना में बड़े स्तर पर अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो पंचायत में हुए विकास कार्यों और योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।




