शासकीय तालाब पर रसूखदारों का कब्जा, अतिक्रमण हटाने में प्रशासन के छूट रहे पसीने
रीवा जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत ग्राम उमरी में स्थित शासकीय तालाब पर प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित इस तालाब की भूमि पर न केवल अवैध कब्जा कर लिया गया है, बल्कि भवन निर्माण और कृषि कार्य भी खुलेआम किए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई अब तक ठोस रूप नहीं ले पाई है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
समाजसेवी सुरेश प्रसाद उर्मलिया ने इस पूरे मामले को उजागर करते हुए बताया कि ग्राम उमरी में स्थित शासकीय तालाब की भूमि क्रमांक 1909 रकवा 0.555 हेक्टेयर एवं 1910 रकवा 0.870 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से सार्वजनिक प्रयोजन हेतु दर्ज है। इसके बावजूद बंशगोपाल, तरूणेन्द्र कुमार, कैलाशनाथ तथा अशोक कुमार (पिता स्व. इन्द्रजीत त्रिपाठी) द्वारा इस भूमि पर बेजा कब्जा कर लिया गया है।
आरोप है कि अतिक्रमणकारियों ने कूट रचित तरीके से आराजी क्रमांक 1909 के अंश भाग (0.320 हेक्टेयर) में अपना नाम दर्ज करवा लिया और उसी आधार पर कब्जा मजबूत कर लिया। इतना ही नहीं, शासकीय भूमि पर विद्यालय निर्माण जैसे कार्यों के नाम पर भी कब्जा जमाया गया है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तालाब का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। जो जलस्रोत कभी गांव के निस्तार, पशुपालन और पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण था, वह अब धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो भविष्य में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इस संबंध में तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठाते हुए समाजसेवी सुरेश प्रसाद उर्मलिया ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा शासकीय तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराकर आम जनता के उपयोग के लिए सुरक्षित किया जाए।


